Prayagraj : चाची की हत्या में भतीजे को मिली उम्रकैद पर हाईकोर्ट की मुहर
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 39 साल पहले जमीन के विवाद में चाची पर कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने के दोषी भतीजे को मिली उम्रकैद पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों के बरी होने का लाभ मुख्य आरोपी को नहीं दिया जा सकता।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 39 साल पहले जमीन के विवाद में चाची पर कुल्हाड़ी मारकर हत्या करने के दोषी भतीजे को मिली उम्रकैद पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने कहा कि सह-आरोपियों के बरी होने का लाभ मुख्य आरोपी को नहीं दिया जा सकता।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सहारनपुर सत्र न्यायालय की ओर से अपीलार्थी इस्लाम के खिलाफ 1990 में पारित दोषसिद्धि और सजा के आदेश को रद्द करने से इन्कार कर दिया।
मामला सहारनपुर के अंबेहता मोहन गांव का है। अभियोजन के मुताबिक दो नवंबर 1987 को सुबह बाहर जा रही चाची मेहमूदन पर उसके भतीजे इस्लाम और अन्य सह-आरोपियों ने संपत्ति विवाद के चलते उस पर कुल्हाड़ी (पालकटी) से हमला कर दिया। मृतका के पिता ने अपनी संपत्ति वसीयतनामे के जरिये मेहमूदन के नाम कर दी थी, जिससे आरोपी पक्ष नाराज था। हमले में गर्दन पर किए गए धारदार वार से महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुलिस ने विवेचना के बाद इस्लाम व अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इस पर चले ट्रायल के बाद सत्र न्यायालय ने इस्लाम को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य सह-आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। दोषसिद्धि व सजा के खिलाफ इस्लाम में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अपीलकर्ता इस्लाम की ओर से दलील दी गई कि एफआईआर एंटीडेटेड है। मेडिकल साक्ष्य अभियोजन कहानी से मेल नहीं खाते और गवाहों की गवाही में गंभीर विरोधाभास हैं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही विश्वसनीय है, घटनास्थल से खून से सनी कुल्हाड़ी बरामद हुई और चिकित्सकीय साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही विश्वसनीय है, घटनास्थल से खून से सनी कुल्हाड़ी की बरामदगी हुई है और डॉक्टर ने न्यायालय के सवाल पर अपनी त्रुटि स्वीकार की है।
कोर्ट ने इस्लाम की अपील खारिज कर दी
कोर्ट ने दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा की पुष्टि करते हुए आदेश दिया कि जमानत पर चल रहा आरोपी 25 फरवरी 2026 तक ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करे, अन्यथा उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।