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हाईकोर्ट : नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत सरकार को देना होगा मुआवजा
Fri, 04 Feb 2022 01:35 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 04 Feb 2022 01:35 AM IST
सार
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने गाजियाबाद में 2004 में भूमि अधिग्रहण किया था लेकिन याची को मुआवजा नहीं मिल सका। प्राधिकरण ने 2014 में अवार्ड घोषित किया। तब याची की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत मुआवजा देने की मांग की।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
- फोटो : iStock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में 2004 में हुए भूमि अधिग्रहण मामले में पूर्व में दिए गए अपने फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत मुआवजे की रकम का भुगतान का आदेश देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओर से दाखिल पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दो याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है।
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मामले में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने गाजियाबाद में 2004 में भूमि अधिग्रहण किया था लेकिन याची को मुआवजा नहीं मिल सका। प्राधिकरण ने 2014 में अवार्ड घोषित किया। तब याची की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत मुआवजा देने की मांग की। कोर्ट ने 2017 में विपक्षी पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाया।
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इस पर उत्तर प्रदेश सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने इस फैसले के खिलाफ पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका फाइल की थी लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार और प्रॉधिकरण दोनों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
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कोर्ट में याची पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता, महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह सहित कई सरकारी अधिवक्ताओं ने और विपक्षी पक्ष की आरे से चंदन शर्मा ने बहस की। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया।