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हाईकोर्ट : डकैती के 44 साल पुराने मामले में दो आरोपियों को हाईकोर्ट ने किया बरी, अभियोजन नहीं दे सका सुबूत

Sat, 07 Nov 2026 02:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Nov 2026 02:00 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला ने डकैती के करीब 44 साल पुराने मामले में दो जीवित आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

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High Court: Two accused acquitted in a 44-year-old robbery case; prosecution failed to provide evidence.
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला ने डकैती के करीब 44 साल पुराने मामले में दो जीवित आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष लूटे गए सामान की सूची की प्रामाणिकता, आरोपियों की घटनास्थल से तत्काल गिरफ्तारी और बरामदगी मेमो की विश्वसनीयता साबित करने में विफल रहा। कोर्ट ने यह फैसला केशव देव व अन्य की याचिका पर दिया।

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मामला मथुरा के थाना राया क्षेत्र में मार्च 1978 में हुई कथित डकैती से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 1982 में सात आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसमें चंद्रपाल को आठ साल व जसवंत को सात की सजा सुनाई गई थी। अपील के लंबित रहने के दौरान पांच आरोपियों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अपील केवल जसवंत और चंद्रपाल के संबंध में विचाराधीन रह गई थी।
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अपीलार्थियों की ओर से दलील दी गई कि गवाहों के बयानों में घटनास्थल, गिरफ्तारी, हथियारों और लूटे गए सामान की बरामदगी को लेकर विरोधाभास हैं। लूटे गए सामान की सूचियां भी उनके लेखकों या हस्ताक्षरकर्ताओं से साबित नहीं कराई गईं। वहीं, पुलिस अधिकारी की गवाही में भी कई महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं।
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कोर्ट ने पाया कि लूटे गए सामान की सूची में बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और नकदी का उल्लेख था जबकि बरामदगी के नाम पर केवल पांच सोने की अंगूठियां और 300 रुपये ही दिखाए गए। अभियोजन पक्ष इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका।

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