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हाईकोर्ट : इविवि कुलपति के विरुद्ध दाखिल निगरानी याचिका  निरस्त

Sat, 07 May 2022 01:00 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 May 2022 01:00 AM IST
सार

जिला जज नलिन कुमार श्रीवास्तव ने शेरडीह निवासी अजय सिंह सम्राट द्वारा प्रस्तुत फौजदारी निगरानी याचिका उनके अधिवक्ता और शासकीय अधिवक्ता के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद निरस्त की।

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High Court: Surveillance petition filed against Allahabad University Vice Chancellor canceled
इलाहाबाद विश्वविद्यालय - फोटो : prayagraj

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव व उत्तर प्रदेश सरकार के विरुद्ध दाखिल की गई फौजदारी निगरानी याचिका को सत्र न्यायालय में सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि सिविल मामलों को फौजदारी का रूप देना गलत है।

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जिला जज नलिन कुमार श्रीवास्तव ने शेरडीह निवासी अजय सिंह सम्राट द्वारा प्रस्तुत फौजदारी निगरानी याचिका उनके अधिवक्ता और शासकीय अधिवक्ता के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद निरस्त की। कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकरण को अपराध बताकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। उस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका निस्तारित हो चुकी है। निर्णय हो चुका है, उस आदेश को चुनौती नहीं दी गई है।
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निगरानी याचिका में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के द्वारा दिए गए आदेश को विधि विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की सत्र न्यायालय से मांग की गई थी। इसमें प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 अप्रैल 2022 को निरस्त कर दिया था।

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धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का आदेश
प्रयागराज। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शिक्षा विभाग प्रयागराज में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व अन्य के विरुद्ध धोखाधड़ी करने के आरोप में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश थाना प्रभारी थाना औद्योगिक क्षेत्र को दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेंद्रनाथ ने आवेदक विंध्यवासिनी प्रसाद के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद थाना प्रभारी को मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करने का आदेश दिया।


अदालत ने कहा कि प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के तथ्यों से प्रथम दृष्टया आवेदक की मृतक बहन को विपक्षी ज्ञान चंद तिवारी द्वारा अपनी पत्नी प्रदर्शित करते हुए कूट रचित दस्तावेज तैयार कर छल करने तथा मृतका की संपत्ति हड़पने का अपरार्ध किया जाना प्रतीत होता है।


विंध्यवासिनी प्रसाद ने आरोप लगाया कि उसकी सगी बहन कांति पांडेय अविवाहित थीं। वह शिक्षा विभाग में नौकरी करती थीं। रिटायर होने के पश्चात नौ जून 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। कांति पांडेय ने अपनी नौकरी के दौरान पर कई संपत्ति बनाई थीं। आवेदक की बहन के विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ज्ञान चंद तिवारी व अन्य विपक्षीगण ने संपत्ति व मकान हड़पने के उद्देश्य से फर्जी कागजात बनवा लिए, जिसमें आवेदक की बहन को अपनी पत्नी लिखवा लिया है।

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