फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Status quo must be maintained; disputed land cannot be transferred to a third party.

High Court : यथास्थिति बनाए रखने के साथ विवादित भूमि तीसरे पक्ष को नहीं दे सकते

Fri, 19 Jun 2026 07:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 19 Jun 2026 07:53 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इटावा की विवादित भूमि से जुड़े मामले में सभी पक्षों को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि मामले के अंतिम निस्तारण तक कोई भी पक्ष उस संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं दे सकेगा।

विज्ञापन
High Court: Status quo must be maintained; disputed land cannot be transferred to a third party.
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इटावा की विवादित भूमि से जुड़े मामले में सभी पक्षों को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि मामले के अंतिम निस्तारण तक कोई भी पक्ष उस संपत्ति को किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं दे सकेगा।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की एकल पीठ ने श्रीराम व अन्य की याचिका पर दिया। याचिका में इटावा जिला जज ने 30 मई 2026 को ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम निषेधाज्ञा (स्टे) निरस्त कर दी थी, जिसे चुनौती दी गई है। याचियों ने 2019 में मूल वाद दाखिल किया था, जिसमें इटावा के तहसील सैफई स्थित एक भूमि को लेकर विवाद है। ट्रायल कोर्ट ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की थी।
विज्ञापन


याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि मूल वाद अभी लंबित है। ऐसे में उस संपत्ति को संरक्षण नहीं दिया गया तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। साथ ही चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, याचियों को उसके बाद तीन सप्ताह में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पॉक्सो के मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा बरकरार

10 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में दोषी को राहत नहीं मिली। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने मुजफ्फरनगर निवासी किरणपाल उर्फ किरण की याचिका पर दिया। मामला 2014 का है। रात में घर से लापता हुई बालिका कुछ घंटों बाद गंभीर अवस्था में मिली थी।


जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। सुनवाई के बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय ने उसे दुष्कर्म और मारपीट का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय हो तो उसी के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है। कोर्ट ने अपील खारिज कर आरोपी को शेष सजा काटने का निर्देश दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed