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High Court : पुलिस के समक्ष सह अभियुक्त का बयान वैध साक्ष्य नहीं, हेरोइन तस्कर को किया आरोप मुक्त
Fri, 06 Dec 2024 05:21 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 06 Dec 2024 05:21 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति आरएमएन मिश्र की अदालत ने दिया। गाजीपुर निवासी अजय पर हेरोइन बरामदगी मामले में एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था। अपर सत्र न्यायाधीश गाजीपुर के दोषमुक्ति अर्जी खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस के समक्ष सह अभियुक्त का कबूलनामा वैध साक्ष्य नहीं है। ट्रायल के दौरान आरोपी के विरुद्ध इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी कर सह अभियुक्त के कबूलनामे के अलावा अन्य साक्ष्य उपलब्ध नहीं होने के आधार पर पुनरीक्षणकर्ता याची अजय कश्यप को एनडीपीएस एक्ट मामले से बरी कर दिया।
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यह आदेश न्यायमूर्ति आरएमएन मिश्र की अदालत ने दिया। गाजीपुर निवासी अजय पर हेरोइन बरामदगी मामले में एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज किया था। अपर सत्र न्यायाधीश गाजीपुर के दोषमुक्ति अर्जी खारिज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की। याची के अधिवक्ता डीएस मिश्र, कनिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मिश्र, चंद्र केश मिश्र ने दलील दी कि याची को मौके से नहीं पकड़ा गया था और न ही उसके पास से मादक पदार्थ बरामद किया गया था।
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गिरफ्तार किए गए सह अभियुक्त के बयान के आधार पर याची को फंसाया गया है। सह अभियुक्त याची का बेटा है। दोषमुक्ति अर्जी पर न्यायालय केवल देखेगी कि उपलब्ध साक्ष्यों व प्रावधानों के तहत प्रथमदृष्टया आपराधिक केस बनता है या नहीं। लेकिन, इस मामले में इसका पालन नहीं किया गया। पुलिस के समक्ष सह आरोपी के बयान के आधार पर याची की दोषमुक्ति अर्जी खारिज कर दी। जबकि, बयान के अलावा याची के विरुद्ध कोई साक्ष्य नहीं है। कोर्ट ने कहा पुलिस के समक्ष कबूलनामा वैध साक्ष्य नहीं है। याची के खिलाफ अन्य साक्ष्य न होने के कारण वह आरोप मुक्त किए जाने योग्य है। कोर्ट ने याची को आरोप मुक्त कर दिया।
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