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हाईकोर्ट : भट्ठा मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाए जाने को लेकर सरकार से मांगा जवाब
Tue, 15 Feb 2022 10:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 15 Feb 2022 10:45 PM IST
सार
मामले में मानवाधिकार आयोग ने याचिका दाखिल की गई है। आयोग के अधिवक्ता शंभू चोपड़ा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 2006 में भट्ठा मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी तय की थी।
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विस्तार
भट्ठा मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी के मामले में दाखिल याचिका पर बुधवार को 11 साल बाद सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वर्तमान समय में अगर कोई न्यूनतम मजदूरी तय की गई है? तो वह उसकी जानकारी उपलब्ध कराएं। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश कुमार बिंदल और न्यायमूर्ति पियूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है।
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मामले में मानवाधिकार आयोग ने याचिका दाखिल की गई है। आयोग के अधिवक्ता शंभू चोपड़ा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 2006 में भट्ठा मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी तय की थी। 2006 में तय की गई मजदूरी के अनुसार भट्टा मजदूरों को एक हजार ईंट बनाने पर कुल 80 रुपये दिए जा रहा था। यह आदेश तबसे चला रहा है।
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उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से न्यनूनतम मजदूरी नहीं बढ़ाई गई। जबकि, दूसरे प्रदेशों में यह मजदूरी को बढ़ा दिया गया है। याचिका में दूसरे प्रदेशों में दी जा रही न्यूनतम मजदूरी की रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। कोर्ट अब मामले में मई में सुनवाई करेगा। इसके पहले मामले में 2011 में पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति एफआई रिबेलो के समय में दो तिथियों पर सुनवाई र्हुई थी।
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