फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court should complete the trial of Sambhal violence in one year, accused Mohammad Ali gets bail.

High Court : संभल हिंसा का ट्रायल एक साल में पूरा करे अदालत, आरोपी मोहम्मद अली को मिली जमानत

Mon, 17 Nov 2025 01:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 17 Nov 2025 01:48 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों के तेजी से निस्तारण के लिए जिला अदालतों में स्पीच-टू-टेक्स्ट एआई ट्रांसक्रिप्शन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान दर्ज करने जैसी उन्नत तकनीकें अपनाने का निर्देश दिया है।

विज्ञापन
High Court should complete the trial of Sambhal violence in one year, accused Mohammad Ali gets bail.
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों के तेजी से निस्तारण के लिए जिला अदालतों में स्पीच-टू-टेक्स्ट एआई ट्रांसक्रिप्शन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बयान दर्ज करने जैसी उन्नत तकनीकें अपनाने का निर्देश दिया है। कहा है कि लंबित मामलों के बोझ और गवाहों की गैरहाजिरी से जूझ रही न्यायिक प्रक्रिया में अब तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है।

विज्ञापन


इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने संभल हिंसा के आरोपी मोहम्मद अली को जमानत दे दी। साथ ही संभल के जिला जज को निर्देश दिया है कि वह इस केस को किसी विशेष अदालत में स्थानांतरित कर एक साल में ट्रायल पूरा कराएं। वहीं, पुलिस अधीक्षक को भी गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन


घटना 24 नवंबर 2024 की है, जब कोर्ट अमीन और पुलिस टीम संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के लिए पहुंची थी। आरोप है कि 700–800 की भीड़ ने टीम पर पथराव व फायरिंग की। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। जांच के बाद पुलिस ने 44 लोगों पर आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि एफआईआर अज्ञात भीड़ के खिलाफ थी। इन 44 में से 37 आरोपी पहले ही जमानत पा चुके हैं। लिहाजा, समानता के आधार पर कोर्ट ने मोहम्मद अली की जमानत भी मंजूर कर ली। वह चार दिसंबर 2024 से जेल में बंद है। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में अज्ञात भीड़ में से केवल 44 लोगों पर आरोपपत्र दाखिल किया जाना दर्शाता है कि कई निर्दोष भी फंस सकते हैं। इसलिए समानता के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed