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High Court : आरोपी की गरीबी देख कोर्ट ने घटाई मुआवजा जमा करने की शर्त
Sat, 14 Mar 2026 04:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 14 Mar 2026 04:45 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामले में आरोपी गाड़ी मालिक व चालक की गरीबी को देखते हुए बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मुआवजे की राशि जमा करने की शर्त को 50 से घटाकर 10 फीसदी कर दी।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामले में आरोपी गाड़ी मालिक व चालक की गरीबी को देखते हुए बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने मुआवजे की राशि जमा करने की शर्त को 50 से घटाकर 10 फीसदी कर दी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने अजमत व अन्य की ओर से प्रथम अपील में पारित पूर्व आदेश को संशोधित करने की अर्जी स्वीकार करते हुए दिया है। मामला सहारनपुर का है। छह नवंबर 2019 को अपीलार्थी की कार से दुर्घटना में रामकिरण उर्फ विजय गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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दुर्घटना के समय कार का बीमा प्रभावी नहीं था। इस पर सहारनपुर मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 17 अक्तूबर 2025 को कार मालिक अजमत और चालक को आदेश दिया था कि वे पीड़ित को 29,11,610 रुपये का मुआवजा सात फीसदी ब्याज संग भुगतान करें।
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इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अपीलार्थी के खिलाफ पारित आदेश पर इस शर्त पर रोक लगी कि वह मुआवजा राशि की 50 फीसदी रकम पीड़ित के पक्ष में जमा करेंगे और बाकी राशि की प्रतिभूति दाखिल करेंगे।
अपीलार्थियों ने इस आदेश को संशोधित करने की मांग के साथ दाखिल अर्जी दाखिल की। उनके अधिवक्ता ने आय प्रमाणपत्र पेश कर दलील दी कि अपीलार्थियों की आर्थिक हालत बेहद खराब है। उनकी आय 48 हजार रुपये सालाना है।
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता मुआवजे का 10 प्रतिशत हिस्सा दो महीने में जमा कर देते हैं और शेष 90 फीसदी के लिए कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार प्रतिभूति देते हैं तो वसूली की कार्यवाही पर रोक जारी रहेगी।