फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Sar Tan Se Juda' is direct challenge to rule of law and sovereignty and integrity of India.

UP : हाईकोर्ट ने कहा- सर तन से जुदा का नारा लगाना कानून के शासन, भारत की संप्रभुता-अखंडता को सीधी चुनौती

Fri, 19 Dec 2025 11:33 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 19 Dec 2025 11:33 AM IST
सार

Allahabad High Court : गुस्ताख ए नबी की एक सजा, सर तन से जुदा नारा लगाना देश की संप्रभुता और कानून के खिलाफ सीधी चुनौती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के मामले में गिरफ्तार आरोपी को जमानत अर्जी देने से इनकार कर दिया। 

विज्ञापन
High Court Sar Tan Se Juda' is direct challenge to rule of law and sovereignty and integrity of India.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा जैसे नारे लगाना न केवल कानून के शासन के विरुद्ध, बल्कि भारत की संप्रभुता और अखंडता को सीधी चुनौती है। इस प्रकार के नारे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या धार्मिक अधिकार के दायरे में नहीं आते। ये आम नागरिकों को हिंसा और सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने के समान हैं। इसी टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने बरेली में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार आरोपी रिहान की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

विज्ञापन


बरेली के कोतवाली थाना क्षेत्र में 26 सितंबर 2025 को हिंसा हुई थी। आरोप है कि बरेली में निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कथित रूप से इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा व एक अन्य ने इस्लामिया इंटर कॉलेज में लोगों को एकत्र करने के लिए उकसाया था। भीड़ ने न केवल विवादित और भड़काऊ नारे लगाए, बल्कि पुलिस पर पथराव, पेट्रोल बम से हमला और फायरिंग भी की। हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी-निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा।
विज्ञापन


रिहान को अन्य लोगों के साथ मौके से ही गिरफ्तार किया गया था और प्राथमिकी दर्ज की गई थी। रिहान ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दायर की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है। वहीं, अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि आरोपी भीड़ के साथ नारा लगा रहा था। पुलिस ने हस्तक्षेप की कोशिश की तो भीड़ हिंसक हो गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

संविधान सभी को स्वतंत्रता देता है लेकिन इसकी एक स्पष्ट सांविधानिक सीमा है

कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा का अधिकार देता है, लेकिन इसकी स्पष्ट सांविधानिक सीमाएं हैं। जब कोई भीड़ कानून को अपने हाथ में लेकर किसी व्यक्ति के लिए सिर कलम करने जैसे मृत्युदंड की मांग करती है तो यह सीधे तौर पर कानून के शासन का अपमान है। कोर्ट ने कहा कि इस्लाम धर्म के नाम पर लगाए जाने वाले ऐसे हिंसक नारे वास्तव में पैगंबर मोहम्मद के आदर्शों के भी विपरीत हैं।

आदेश में कहा गया कि पैगंबर मोहम्मद ने अपने जीवन में अपमान और कष्ट सहने के बावजूद दया, करुणा और क्षमा का मार्ग अपनाया। न्यायालय ने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि पैगंबर मोहम्मद ताइफ शहर गए। वहां उनकी एक गैर-मुस्लिम पड़ोसी रहती थी, जो अक्सर उनके रास्ते में कूड़ा फेंककर परेशान करती थी, लेकिन पैगंबर ने कभी भी पलटवार नहीं किया।

धार्मिक नारे जब तक उकसाने के लिए न लगाए जाएं अपराध की श्रेणी में नहीं

जब पड़ोसी बीमार पड़ गई तो पैगंबर उससे मिलने गए। इसके परिणामस्वरूप पड़ोसी ने इस्लाम धर्म अपना लिया। पैगंबर मोहम्मद के इस कार्य से बुराई को अच्छाई से दूर करने का उनका दृढ़ सिद्धांत ध्यान प्रदर्शित होता है। इसलिए यदि इस्लाम का कोई अनुयायी नबी का अपमान करने वाले किसी व्यक्ति का सिर कलम करने का नारा लगाता है तो यह पैगंबर मोहम्मद के आदर्शों का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सर तन से जुदा जैसे नारे का उद्भव भारत की सांस्कृतिक, कानूनी या धार्मिक परंपराओं से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह पड़ोसी देश के ईशनिंदा कानूनों और वहां हुई हिंसक घटनाओं से प्रभावित है। कोर्ट ने नारा-ए-तकबीर या जय श्री राम जैसे धार्मिक जयकारों और हिंसा को उकसाने वाले नारों के बीच स्पष्ट अंतर करते हुए कहा कि जब तक धार्मिक नारे दुर्भावनापूर्ण तरीके से दूसरों को डराने या हिंसा भड़काने के लिए इस्तेमाल न किए जाएं, तब तक वे अपराध की श्रेणी में नहीं आते। अपराध की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत देने से इन्कार करते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed