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हाईकोर्ट ने कहा : महिला प्रधानों को उनके अधिकारों व कार्याें के बारे में दिया जाए प्रशिक्षण

Thu, 24 Oct 2024 02:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 24 Oct 2024 02:12 PM IST
सार

गाजीपुर की अंबिका यादव व अन्य ने हाईकोर्ट में गांव की आरक्षित भूमि पर पानी की टंकी-आरसीसी सेंटर बनाए जाने के विरोध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याची के वकील ने दलील दी कि कोई भूमि किसी विशेष उद्देश्य (जैसे चारागाह, खलिहान आदि) के लिए आरक्षित है तो उसकी प्रकृति को उचित प्रक्रिया से असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर नहीं बदला जा सकता है।

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High Court said: Women heads should be given training about their rights and duties.
court - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि महिला ग्राम प्रधानों को उनके अधिकारों व कार्याें के बारे में जागरूक किया जाए। ताकि, प्रधानपति के कार्य करने के चलन को हतोत्साहित किया जाए। यह आदेश सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने गाजीपुर की जनहित याचिका पर दिया है।

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गाजीपुर की अंबिका यादव व अन्य ने हाईकोर्ट में गांव की आरक्षित भूमि पर पानी की टंकी-आरसीसी सेंटर बनाए जाने के विरोध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याची के वकील ने दलील दी कि कोई भूमि किसी विशेष उद्देश्य (जैसे चारागाह, खलिहान आदि) के लिए आरक्षित है तो उसकी प्रकृति को उचित प्रक्रिया से असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर नहीं बदला जा सकता है।
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केवल संबंधित ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर निर्माण की अनुमति दी गई, जो गलत है। वहीं, राज्य के वकील ने दलील दी कि पानी की टंकी और बोरिंग के निर्माण के लिए एक उपयुक्त स्थान खोजा गया, लेकिन नहीं मिला। इसके बाद गांव सभा के प्रस्ताव के आधार पर उपयुक्त भूमि निर्धारित की गई और निर्माण किया गया। कुछ गांवों में निर्माण पूरा हो चुका है।

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हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी जनहित याचिकाओं का निपटारा किया। साथ ही संबंधित विभाग को तीन महीने की अवधि के भीतर प्रधानों, विशेष रूप से महिलाओं को उनके अधिकारों और कार्यों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का निर्देश दिया।

रवींद्र नाथ राय की जनहित याचिका पर निर्देश दिया कि यदि पानी टंकी का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। संभव हो तो संबंधित अधिकारी उक्त गाटा के कोने में स्थानांतरित कर लें। सुनील की जनहित याचिका में निर्देश दिया गया है कि प्रधान या स्वयं प्रधान के परिवार के किसी भी व्यक्ति ने यदि गांव सभा की भूमि पर अतिक्रमण किया है तो उसे आज से एक महीने के भीतर हटा दिया जाए। कोर्ट ने प्रमुख सचिव, पंचायत राज विभाग, उप्र शासन को आदेश के अनुपालन के लिए प्रति आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया है।

ग्रामीण के बीच सहमति बनाना जरूरी

कोर्ट ने किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए आरक्षित जमीन का छोटा हिस्सा भी सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है तो राज्य के अधिकारी संबंधित ग्रामसभा संग सहमति बनाने का प्रयास करेंगे। ताकि, ग्रामीण सार्वजनिक मुद्दे का विरोध करने के लिए इस न्यायालय का दरवाजा न खटखटा सकें।
 

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