हाईकोर्ट ने कहा : सेवानिवृत परिलाभ कर्मचारी का अधिकार है, सरकार की कृपा नही, कानपुर के नगर आयुक्त को किया तलब
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ अप्रैल की तारीख नियत करते इस मामले समेत कई अन्य लंबित याचिका के जिक्र करते हुए कानपुर नगर के नगर आयुक्त से जानकारी तलब की है। पूछा है कि दिसंबर, 2023 तक ऐसे कितने कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिन्हें सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान नहीं किए गए हैं।
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पेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभों को लेकर सरकारी विभागों की लेटलतीफी से खफा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की पेंशन और सेवानिवृत्ति परिलाभ सरकार की कृपा या वरदान नहीं है। यह कर्मचारी का कानूनी अधिकार है। इसे समय से बिना किसी टालमटोल के कर्मचारी को अदा करना सरकार का परम दायित्व है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने कानपुर नगर निगम में तैनात रहे सफाईकर्मी की पत्नी छाया की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
याची के पति निगम में सफाईकर्मी थे, जिन्हें सेवानिवृत्ति परिलाभों का भुगतान नहीं किया गया था। इससे क्षुब्द कर्मचारी की पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नगर आयुक्त कानपुर से पूरी जानकारी के साथ व्यक्तिगत हलफनामे पर तलब किया था। नगर आयुक्त की ओर से दाखिल हलफनामे में सेवानिवृत्ति परिलाभों के बारे में कोई जिक्र न करते हुए सिर्फ इतना बताया गया कि एलआईसी लखनऊ को बीमा राशि भुगतान के लिए 23 मार्च 24 को पत्र लिखा गया है।
इस जानकारी से असंतुष्ट कोर्ट ने ऐसे मामलों में सरकारी कार्यशैली पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा इस तरह की तमाम याचिकाएं कोर्ट में दाखिल है, जिनमें सेवानिवृत्ति परिलाभों के भुगतान का समादेश जारी करने की मांग की गई है। इस पर कोर्ट ने कहा पेंशन आदि पाना कर्मचारी का अधिकार है, कोई कृपा, दया नहीं है। इसका भुगतान बिना टालमटोल के समय से किया जाना चाहिए।
खफा कोर्ट पूछा... नगर आयुक्त बताएं, सेवानिवृति के कितने मामले लंबित, क्या-क्या की करवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ अप्रैल की तारीख नियत करते इस मामले समेत कई अन्य लंबित याचिका के जिक्र करते हुए कानपुर नगर के नगर आयुक्त से जानकारी तलब की है। पूछा है कि दिसंबर, 2023 तक ऐसे कितने कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिन्हें सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान नहीं किए गए हैं। पेंशन को लेकर कितनी याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं। लंबित मामलों में अभी तक सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान करने के लिए क्या कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट ने अगली तिथि पर नगर आयुक्त को हाजिर होने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का भी दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से केआर. सुंदरम बनाम तमिलनाडु राज्य व अन्य कई मामलों का भी जिक्र किया, जिसमे कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को पेंशन देना उसकी लंबी सेवा का पुरस्कार भी नहीं हैं, बल्कि यह सरकार का बाध्यकारी दायित्व है, जिसका दावा कर्मचारी अधिकार के रूप में कर सकता है।