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हाईकोर्ट ने कहा : गिरोह का सदस्य होने मात्र से नहीं दी जा सकती सजा, गैंग में सक्रिय संलिप्तता जरूरी
Sun, 06 Oct 2024 04:43 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 06 Oct 2024 04:43 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने सुकर्म पाल उर्फ अमित जाट की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। मामला चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र का है।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंदौली पुलिस की ओर से तैयार गैंग चार्ट व उससे जुड़ी एफआईआर को रद्द कर दिया। कहा कि किसी गिरोह में सदस्य होने मात्र से उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में सजा नहीं दी जा सकती। इसके लिए उस व्यक्ति का गैंग में सक्रिय संलिप्तता होना जरूरी है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने सुकर्म पाल उर्फ अमित जाट की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। मामला चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र का है। याची के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट पर 14 फरवरी 2024 को गैंग चार्ट स्वीकृत हुआ और 29 फरवरी को गैंगस्टर अधिनियम की धारा 3(1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
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याची ने दोनों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसका कहना था कि एफआईआर अवैध रूप से दर्ज की गई है। क्योंकि, इसमें तीन साल पहले हुई घटनाओं का संदर्भ दिया गया है। कोर्ट ने गैंग चार्ट और एफआईआर को रद्द कर दिया। कहा कि आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय संलिप्तता के बिना किसी गिरोह में सदस्यता मात्र से उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के तहत सजा का औचित्य नहीं बनता।
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किसी व्यक्ति को गैंगस्टर अधिनियम के तहत दंडित करने के लिए यह साबित किया जाए कि वह सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने या भौतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था।