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हाईकोर्ट ने कहा : सरकारी वकील के निजी सचिव को कानूनी दस्तावेजों में बदलाव का अधिकार नहीं
Tue, 25 Feb 2025 07:01 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 25 Feb 2025 07:01 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील के निजी सचिव की भूमिका पूरी तरह से लिपिकय है। उन्हें अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों में परिवर्तन करने का अधिकार नहीं है।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी वकील के निजी सचिव की भूमिका पूरी तरह से लिपिकय है। उन्हें अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों में परिवर्तन करने का अधिकार नहीं है। इस तरह के कृत्य न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता को कमजोर करते हैं। साथ ही सरकारी वकील के कार्यालय के कामकाज और जवाबदेही के बारे में गंभीर सवाल उठाते हैं।
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जिम्मेदारी अधिकारियों की घोर लापरवाही, साथ ही कानूनी कार्यवाही में अनुचित हस्तक्षेप न्याय प्रणाली की नींव पर प्रहार करता है। इस तरह का कृत्य अक्षम्य है। भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्कला सुधारात्मक कार्यवाही की जरूरत है। यह कठोर टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने सरकारी वकील के हलफनामे के पहले पृष्ठ को बदलने के लिए निजी सचिव को जिम्मेदार पाते हुए की।
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कोर्ट ने कहा कि यह कार्य हलफनामा लिखवाने वाले के पहचान को छुपाने के लिए किया गया है, जो अनुचित है। फतेहपुर के कोतवाली थाना में शानू सक्सेना पर 2020 में दहेज उत्पीड़न सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। 07 जनवरी 2022 को आरोप पत्र दायर किया गया और 11 अप्रैल 2022 को समन जारी किया गया है, लेकिन आवेदकों को समन प्राप्त नहीं हुआ।
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