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हाईकोर्ट ने कहा : तकनीकी दोष की आपत्ति जांच के अंतिम चरण में पोषणीय नहीं
Thu, 28 Dec 2023 03:33 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 28 Dec 2023 03:33 PM IST
सार
2022 में विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर डीएम ने रामश्री के खिलाफ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व सहायक अभियंता की दो सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच का आदेश पारित किया। चार मई 2023 को प्रधान ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल किया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : Amar ujala
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि तकनीकी दोष के आधार पर अगर प्रारंभिक स्तर पर आपत्ति नहीं की गई है तो वह जांच के अंतिम चरण में सुनवाई के लिए पोषणीय नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने बदायूं की दातागंज तहसील की टेढ़ी ग्राम पंचायत की प्रधान रामश्री की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। प्रधान ने डीएम की ओर से प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्रतिबंधित करने वाले आदेश को चुनौती दी थी।
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2022 में विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर डीएम ने रामश्री के खिलाफ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व सहायक अभियंता की दो सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच का आदेश पारित किया। चार मई 2023 को प्रधान ने कारण बताओ नोटिस का जवाब दाखिल किया। इसके बाद डीएम ने प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्रतिबंधित करने का आदेश पारित किया तो रामश्री ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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अधिवक्ता ने दलील दी कि शिकायती पत्र में लगे आरोप न तो किसी दस्तावेजी साक्ष्य से समर्थित हैं और न ही इसके समर्थन में कोई हलफनामा दाखिल किया गया है। ऐसे पत्र तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं। साथ ही पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत होने के कारण पोषणीय नहीं है।
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कोर्ट ने प्रधान की दलीलों को खारिज कर दिया। कहा कि शिकायती पत्र के इस तकनीकी दोष पर याची ने प्रारंभिक स्तर पर कोई आपत्ति नहीं उठाई। ऐसे में डीएम की ओर से पारित आदेश को इस नए आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती। यह आपत्ति प्रारंभिक स्तर पर उठाई गई होती तो शिकायतकर्ता इसका निस्तारण करता।