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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court said: If there is no possibility of completion of trial soon, then it is unjust to keep the accused

हाईकोर्ट ने कहा : जल्द ट्रायल पूरा होने की संभावना नहीं तो आरोपी को जेल में रखना अन्यायपूर्ण

Wed, 05 Feb 2025 06:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Feb 2025 06:36 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जल्द ट्रायल पूरा होने की संभावना नहीं है तो आरोपी को जेल में रखना अन्यायपूर्ण और अनुचित है। न्यायालय ने आरोपी के लगभग सात साल और नौ महीने से जेल में बंद होने पर खेद जताया।

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High Court said: If there is no possibility of completion of trial soon, then it is unjust to keep the accused
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जल्द ट्रायल पूरा होने की संभावना नहीं है तो आरोपी को जेल में रखना अन्यायपूर्ण और अनुचित है। न्यायालय ने आरोपी के लगभग सात साल और नौ महीने से जेल में बंद होने पर खेद जताया। कहा कि ट्रायल पूरा न होने की वजह से लंबे समय तक आरोपी का जेल में रहना उसके मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने सर्वजीत सिंह की द्वितीय जमानत अर्जी स्वीकार कर लिया। गोरखपुर के झंगहा थाने में सर्वजीत पर हत्या व हत्या का प्रयास मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। उसपर गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। पहली जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर 2020 को खारिज कर दिया था। यह उसने दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट में मुकदमा आगे नहीं बढ़ रहा है। निकट भविष्य में मुकदमे के समापन की कोई संभावना नहीं है। आरोपी 23 मई 2017 से जेल में है। यह उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि उसे बिना किसी गलती के कैद किया गया है। आरोपी परीक्षण के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है। जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा। प्रतिवाद के अधिवक्ता ने जमानत याचिका का इस आधार पर विरोध किया गया है कि आवेदक मुख्य आरोपी है, क्योंकि उसने गोली चलाई थी, जिससे मौत हुई।

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न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्योंकि तीन आरोपी व्यक्ति अभी भी फरार हैं, निकट भविष्य में मुकदमे के समापन की कोई संभावना नहीं है। साथ ही अभी सोलह गवाहों में से मात्र तीन गवाहों की ही गवाही हो पाई है। इसके अलावा सीआरपीसी की धारा 319 के तहत अतिरिक्त अभियुक्त को बुलाने के मामले में पहले से ही जांच किए गए गवाहों के बयान फिर से दर्ज किए जाने हैं और ट्रायल लगभग नए सिरे से आगे बढ़ेगा। ऐसे में न्यायालय का विचार है कि आवेदक ने जमानत के लिए मामला बनाया है। सशर्त जमानत अर्जी मंजूर की जाती है।

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