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हाईकोर्ट ने कहा : सैनिकों के परिवारों की सुरक्षा के लिए शिकायत निवारण तंत्र बनाएं, राज्य सरकार तय करे जवाबदेही
Sat, 21 Dec 2024 08:10 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 21 Dec 2024 08:10 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकलपीठ ने शीतल चौधरी की याचिका पर दिया। कोर्ट ने कहा-सेवारत रक्षाकर्मियों के पारिवारिक सदस्यों के किसी भी पत्र पर सक्षम राज्य प्राधिकारी तुरंत संज्ञान लें और इसका निवारण सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार की ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र का यह दायित्व है कि वह सैनिकों के परिवारों को सुरक्षा प्रदान करे। साथ ही राज्य सरकार सैनिकों के परिवारों की सुरक्षा और कल्याण के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र बनाए।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकलपीठ ने शीतल चौधरी की याचिका पर दिया। कोर्ट ने कहा-सेवारत रक्षाकर्मियों के पारिवारिक सदस्यों के किसी भी पत्र पर सक्षम राज्य प्राधिकारी तुरंत संज्ञान लें और इसका निवारण सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार की ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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फिरोजाबाद की याची शीतल चौधरी एक संवेदनशील सीमा क्षेत्र में तैनात सैन्यकर्मी की पत्नी हैं। एक व्यक्ति उनको परेशान कर रहा था। उनके पति ने डीएम व पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की। लेकिन, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची की शिकायत पर संबंधित अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे उनके पति की राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सेवारत रक्षाकर्मियों की परिवारीजनों की शिकायत के निवारण के लिए तंत्र विकसित किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कई सुझाव भी दिए।