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हाईकोर्ट ने कहा : नाउम्मीदी, विश्वासघात और भावनात्मक संकट के शिकार हो जाते हैं ठगे गए लोग

Fri, 22 Mar 2024 06:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 22 Mar 2024 06:00 PM IST
सार

धोखाधड़ी वाली योजनाओं को पहचानने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इसके अलावा, कॅरियर विकास और कौशल वृद्धि के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए। न्यायालय ने छात्रों और नौकरी चाहने वालों को संवेदनशील बनाने पर जोर दिया।

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High Court said: Cheated people become victims of hopelessness, betrayal and emotional distress.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : Amar ujala

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौकरी के नाम पर ठगी के आरोपी की जमानत खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि ठगी के शिकार लोग विश्वासघात, भावनात्मक संकट और नाउम्मीदी के शिकार हो जाते हैं। धोखाधड़ी वाली योजनाओं को पहचानने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इसके अलावा, कॅरियर विकास और कौशल वृद्धि के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाने चाहिए। न्यायालय ने छात्रों और नौकरी चाहने वालों को संवेदनशील बनाने पर जोर दिया।

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कहा कि वैध रोजगार के अवसर केवल योग्यता और मेहनत से प्राप्त होते हैं। राज्य सरकार से कहा कि उन लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाएं जो फर्जी तरीकों से निर्दोष व्यक्तियों की आकांक्षाओं का फायदा उठाना चाहते हैं। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

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मामले में चंद्रशेखर ने भारतीय खाद्य निगम में तीन युवकों की नौकरी लगवाने के नाम पर पर उनके परिजनों से रुपये लिए। इसके बाद मोबाइल पर फर्जी नियुक्ति पत्र भी भेज दिया। युवकों को नियुक्ति के लिए छपरा (बिहार) ले जाया गया। जहां निजी कमरे में 25 दिनों तक युवकों को रखा गया। इसके बाद चंद्रशेखर प्रसाद ने युवकों को बताया कि वे अपने आवास पर जाएं और नियुक्ति का सत्यापन होते ही उन्हें इसकी सूचना दे दी जाएगी।

इसके बाद से युवकों को विभाग में न नियुक्त किया गया है और न ही रुपये वापस किए गए। इस मामले में चंद्रशेखर, पंकज कुमार राजभर और अभिषेक कुमार पर थाना भटनी, देवरिया में धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कराया गया था। चंद्रशेखर ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत देने पर आवेदक सबूतों के साथ छेड़छाड़, गवाहों को प्रभावित करने के साथ ही दोबारा अपराध कर सकता है। कोर्ट ने जमानत आवेदन को अस्वीकार कर दिया।

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