हाईकोर्ट ने कहा : संविदा कर्मियों के नियमितीकरण पर छह सप्ताह में निर्णय ले बीएचयू प्रशासन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को लंबे समय से कार्यरत तीन संविदा कर्मचारियों श्रीराम सिंह, रघु दयाल यादव और सियाराम सिंह के नियमितीकरण के संबंध में छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को लंबे समय से कार्यरत तीन संविदा कर्मचारियों श्रीराम सिंह, रघु दयाल यादव और सियाराम सिंह के नियमितीकरण के संबंध में छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने दिया है।
याची 1998 में कुलपति के आदेश पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में रखे गए थे। 2002 में उनकी नौकरी की तकनीकी प्रकृति को देखते हुए कुलपति ने अनुबंध के आधार पर उनकी सेवा को मंजूरी दी। बीएचयू के कुलपति की ओर से गठित टेलीफोन एक्सचेंज समिति ने याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन कुलपति ने स्वीकार करते हुए 16 अक्तूबर 2004 को एक आदेश पारित किया था। हालांकि, इस आदेश को कभी भी लागू नहीं किया गया। ऐसे में कर्मचारी नियमित नहीं हो सके। कर्मचारियों ने नियमितीकरण के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि बीएचयू के रिकॉर्ड में इन याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को संतोषजनक पाया गया है। याची 2004 के कुलपति के स्थायीकरण आदेश और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न आदेशों के आलोक में नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन सिद्धांत के अनुसार बकाया सहित सभी आर्थिक लाभ पाने के हकदार हैं।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद याचियों को दो सप्ताह के भीतर बीएचयू के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष एक नया अभ्यावेदन दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही बीएचयू को अभ्यावेदन प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आदेश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी।