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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court rules that an unsuccessful IVF procedure does not constitute fraud; case against doctor quashed.

यूपी : हाईकोर्ट ने कहा-आईवीएफ प्रक्रिया असफल होना धोखाधड़ी नहीं, डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा रद्द

Tue, 03 Nov 2026 01:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 03 Nov 2026 01:37 PM IST
सार

आईवीएफ उपचार से गर्भधारण नहीं होने पर डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि मेडिकल प्रक्रिया का असफल होना अपने आप में अपराध नहीं है। धोखाधड़ी साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि डॉक्टर की मंशा शुरुआत से ही मरीज को धोखा देने की थी। कोर्ट ने महिला फर्टिलिटी विशेषज्ञ के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

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High Court rules that an unsuccessful IVF procedure does not constitute fraud; case against doctor quashed.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रिया का सफल न होना अपने आप में धोखाधड़ी का अपराध नहीं है। केवल मेडिकल प्रक्रिया का मनचाहा परिणाम नहीं मिलने या अनुबंध का पालन नहीं होने के आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए साबित करना होगा कि आरोपी का शुरुआत से ही धोखा देने का इरादा था।

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न्यायमूर्ति चव्हाण प्रकाश की एकल पीठ ने एक महिला फर्टिलिटी विशेषज्ञ के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। मामला बुलंदशहर के एक अस्पताल एवं फर्टिलिटी सेंटर में आईवीएफ उपचार से जुड़ा था। शिकायतकर्ता जयवीर सिंह का आरोप था कि डॉक्टर ने उनकी पत्नी को आईवीएफ से गर्भवती करने का भरोसा देकर 3.5 लाख रुपये लिए, लेकिन उपचार के बाद भी गर्भधारण नहीं हुआ। पैसे वापस मांगने पर डॉक्टर ने इन्कार कर दिया था। इस पर डॉक्टर के खिलाफ 156 (3) के तहत वाद दायर किया।
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ट्रायल कोर्ट ने धोखाधड़ी के तहत डॉक्टर के खिलाफ समन आदेश जारी किया था। याची डॉक्टर ने इस पूरे मामले को रद्द करने की मांग में याचिका दायर की। डॉक्टर ने दलील दी कि आईवीएफ की सफलता की कोई गारंटी नहीं होती और प्रक्रिया का असफल होना धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल साइंस पूर्ण विज्ञान नहीं है। आईवीएफ की सफलता कई शारीरिक कारकों पर निर्भर करती है। उपचार के लिए ली गई रकम पेशेवर फीस थी, धोखाधड़ी से हासिल की गई संपत्ति नहीं।
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कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को समन जारी करने से पहले साक्ष्यों का न्यायिक विवेक से परीक्षण करना चाहिए। यांत्रिक तरीके से समन जारी करना उचित नहीं है। कोर्ट ने समन आदेश, पुनरीक्षण अदालत का आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। 

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