फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court remarks- Consensual physical relationship with an adult is not rape

UP : हाईकोर्ट की टिप्पणी- बालिग संग सहमति से शारीरिक संबंध बनना दुष्कर्म नहीं, आरोपी को रिहा करने का आदेश

Wed, 14 Jan 2026 06:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Jan 2026 06:49 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म में दस साल कैद की सजा पाए युवक को बेगुनाह करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि बालिग की सहमति से शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं कहलाता है।

विज्ञापन
High Court remarks- Consensual physical relationship with an adult is not rape
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण और दुष्कर्म में दस साल कैद की सजा पाए युवक को बेगुनाह करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि बालिग की सहमति से शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं कहलाता है। यह फैसला न्यायमूर्ति अचल सचदेव की अदालत ने झांसी निवासी युवक भगवत कुशवाहा की अपील स्वीकार करते हुए सुनाया है।

विज्ञापन


मामला झांसी के सकरार थाना क्षेत्र का है। 2015 में पीड़िता को नाबालिग बताते हुए पहले उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई, फिर युवक पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाया। एफआईआर के अगले दिन ही पुलिस ने युवती को मऊरानीपुर रेलवे स्टेशन से युवक संग बरामद किया था। विवेचना के दौरान युवक पर दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं तामील कर दी गईं। ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन के आठ गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके बाद युवक को अपहरण और दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए दस साल की कैद और बीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
विज्ञापन


इसके खिलाफ युवक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी। उसने स्वयं अपनी मर्जी से घर छोड़ा था। न तो अपहरण का कोई प्रमाण है और न ही जबरन शारीरिक संबंध का। मेडिकल रिपोर्ट भी अभियोजन के दावे का समर्थन नहीं करती। कोर्ट ने कहा कि जब ट्रायल कोर्ट स्वयं पीड़िता को बालिग मान चुका है तो उसकी सहमति को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में आरोपी को दोषी ठहराना कानूनन गलत है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई सजा के आदेश को रद्द करते हुए युवक को तत्काल रिहा करने का आदेश सुना दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सहमति आपराधिक दायित्व तय करने का मूल तत्व है और केवल आरोप के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती - हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed