{"_id":"666aa0d25c73472559016ec1","slug":"high-court-rehabilitation-and-resettlement-compensation-mandatory-for-land-acquisition-2024-06-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : भूमि अधिग्रहण के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन मुआवजा अनिवार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : भूमि अधिग्रहण के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन मुआवजा अनिवार्य
Thu, 13 Jun 2024 01:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 13 Jun 2024 01:03 PM IST
सार
न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की कोर्ट ने मिर्जापुर की याची गीता कुमारी की याचिका पर आदेश देते हुए यह टिप्पणी की। याची ने जमीन अधिग्रहण किए जाने के बाद पुनर्वास और पुनर्स्थापन मुआवजा न मिलने पर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) व अन्य के खिलाफ याचिका दाखिल की।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में पुनर्वास और पुनर्स्थापन मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के बाद भी सक्षम प्राधिकारी मुआवजा जारी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में रोजाना आधा दर्जन याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की कोर्ट ने मिर्जापुर की याची गीता कुमारी की याचिका पर आदेश देते हुए यह टिप्पणी की। याची ने जमीन अधिग्रहण किए जाने के बाद पुनर्वास और पुनर्स्थापन मुआवजा न मिलने पर नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) व अन्य के खिलाफ याचिका दाखिल की।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इस संबंध में पहले ही केंद्र सरकार को कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया था। इसपर 15 मई 2024 को एक परिपत्र प्रस्तुत किया गया, जिसे न्यायालय ने अपर्याप्त पाया। इस पर न्यायालय ने तीन सप्ताह का समय देते हुए एक नया परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकारी के समक्ष मुआवजे के लिए एक प्रतिवेदन प्रस्तुत करें और प्राधिकारी 12 सप्ताह में इस पर उचित आदेश पारित करें।
विज्ञापन