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High Court : पंचायत मित्र की नियुक्ति से इन्कार, अगली भर्ती में आयु सीमा में छूट का आदेश
Thu, 13 Aug 2026 06:19 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 13 Aug 2026 06:19 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 साल पुरानी पंचायत मित्र भर्ती के तहत अब नियुक्ति देने से इन्कार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने भविष्य में होने वाली भर्ती में याचिका लंबित रहने की अवधि के बराबर आयु सीमा में छूट देने का आदेश दिया है।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 साल पुरानी पंचायत मित्र भर्ती के तहत अब नियुक्ति देने से इन्कार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने भविष्य में होने वाली भर्ती में याचिका लंबित रहने की अवधि के बराबर आयु सीमा में छूट देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने महोबा निवासी मनोज कुमार की याचिका पर दिया। याचिका में 12 मार्च 2007 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिये याची का चयन रद्दकर वरीयता सूची में शामिल दूसरे अभ्यर्थी को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।
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मामला चरखारी ब्लॉक की ब्रजपुरा ग्राम पंचायत का है। राज्य सरकार ने तीन जुलाई 2006 के शासनादेश के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लिए ग्राम पंचायतों में पंचायत मित्र नियुक्त करने का प्रावधान किया था। इसके तहत याची ने भी आवेदन किया। योग्यता के आधार पर वह वरीयता सूची में प्रथम स्थान पर रहा। जिला पंचायतराज अधिकारी ने उसे पंचायत मित्र के रूप में चयनित भी कर लिया था।
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इसी बीच ग्राम प्रधान ने याची के खिलाफ अपनी पत्नी को आशा कार्यकर्ता के पद पर नियुक्त कराने के लिए दस्तावेज में हेराफेरी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करा दी। मामले में आरोपपत्र भी दाखिल हुआ। आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर याची को नियुक्ति का अनुबंध करने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में जिला पंचायतराज अधिकारी ने उसका चयन निरस्त कर दिया।
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याचिका लंबित रहने के दौरान मनोज को 29 अक्तूबर 2012 को आपराधिक मामले में बरी कर दिया गया। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने कहा कि अब मूल नियुक्ति का लाभ देना व्यावहारिक नहीं है। याचिका लंबित रहने के दौरान 19 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। संबंधित नियुक्ति की अवधि भी मूलरूप से एक वर्ष थी, जिसे अधिकतम दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता था। ऐसी परिस्थितियों में इतनी देरी से पुराने चयन के आधार पर राहत देना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर स्पष्ट किया कि यदि पंचायत मित्र के पद पर नए सिरे से चयन की प्रक्रिया नियमों के तहत संभव है तो अधिकारी उसे करा सकते हैं। नई चयन प्रक्रिया में याची आवेदन करता है तो उसे याचिका के लंबित रहने की अवधि के बराबर आयु में छूट प्रदान की जाएगी।