High Court : हाईकोर्ट ने पत्नी को परिवार न्यायालय के भत्ता देने के आदेश पर लगाई रोक, मांगा जवाब
न्यायालय ने कहा कि याची पति बेटी को भत्ता देने में कोई चूक करता है, तो अंतरिम आदेश को रद्द किया जा सकता है। न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की अदालत ने गुरुग्राम निवासी अनुज त्यागी की पुनरीक्षण याचिका पर यह आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी को परिवार न्यायालय गाजियाबाद के भत्ता देने के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही बेटी को मिलने वाले भत्ते को जारी रखने का आदेश दिया है। न्यायालय ने कहा कि याची पति बेटी को भत्ता देने में कोई चूक करता है, तो अंतरिम आदेश को रद्द किया जा सकता है। न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की अदालत ने गुरुग्राम निवासी अनुज त्यागी की पुनरीक्षण याचिका पर यह आदेश दिया है।
गाजियाबाद निवासी वर्षा त्यागी त्यागी ने परिवार न्यायालय में वाद दाखिल कर स्वयं व बेटी के लिए भत्ता दिए जाने की गुहार लगाई थी। इसपर न्यायालय ने वर्षा के लिए पांच हजार रुपये व बेटी के लिए 10 हजार रुपये भरण-पोषण भत्ता दिए जाने का आदेश दिया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची के वकील सुनील चौधरी ने दलील दी कि प्रतिवादी (याची की पत्नी) ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया था कि वह निजी नौकरी कर रही थी और मामले के लंबित रहने के दौरान नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। याची ने एक आवेदन दायर कर कहा था कि पत्नी अभी भी नौकरी में है, लेकिन इसपर विचार नहीं किया और आदेश पारित कर दिया गया। ऐसे में विवादित आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है।
न्यायालय ने इसे विचारणीय मानते हुए प्रतिवादी से जवाबी हलफनामा मांगा है। सुनवाई के लिए 9 जनवरी 2025 की तिथि नियत की है। वहीं अगले आदेश तक पत्नी के भत्ता पर रोक लगा दी है। बेटी को 10 हजार रुपये भत्ता मिलता रहेगा।