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High Court : सार्वजनिक सुरक्षा किरायेदारों के अधिकार से ज्यादा महत्वपूर्ण, दो सप्ताह में गिराएं जर्जर भवन

Sat, 21 Feb 2026 02:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Feb 2026 02:59 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई इमारत जर्जर अवस्था में हो और उससे जनहानि का खतरा हो तो सार्वजनिक सुरक्षा किरायेदारों के अधिकारों से ऊपर मानी जाएगी।

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High Court Public safety is more important than tenants rights
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई इमारत जर्जर अवस्था में हो और उससे जनहानि का खतरा हो तो सार्वजनिक सुरक्षा किरायेदारों के अधिकारों से ऊपर मानी जाएगी। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने वाराणसी नगर निगम को आदेश दिया है कि वह इंग्लिशिया लाइन स्थित मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धर्मार्थ सेवा समिति के जर्जर भवन को दो सप्ताह के भीतर ध्वस्त करे। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दिया है।

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वाराणसी के इंग्लिशिया लाइन स्थित भवन को नगर निगम ने तीन अगस्त 2021 को ही असुरक्षित घोषित कर दिया था। लंबे समय से किरायेदारों की मौजूदगी और दीवानी मुकदमों के कारण कार्रवाई रुकी हुई थी। इसी बीच 29 अगस्त 2025 को इमारत का एक हिस्सा गिर जाने से सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया। याची मुक्तेश्वर महादेव मुक्तेश्वरी दुर्गा धमार्थ सेवा समिति और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जर्जर भवन को ध्वस्त करने की मांग उठाई।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत नगर आयुक्त के पास किसी भी खतरनाक इमारत को गिराने की पूर्ण शक्ति है। अदालत ने साफ किया कि एक बार जब इमारत आधिकारिक तौर पर खतरनाक घोषित हो जाती है तो वहां रहने वाले सभी लोग उसे खाली करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।
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कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम 2021 किरायेदारों को सुरक्षा जरूर प्रदान करता है, लेकिन यह कानून खतरनाक इमारतों को गिराने की सरकारी शक्तियों को सीमित नहीं कर सकता। हालांकि, मानवीय आधार पर कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि मकान में रहने वाले लोगों को अपना सामान निकालने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी करने और पुलिस प्रशासन को कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त बल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ध्वस्तीकरण के बावजूद किरायेदारों के अन्य कानूनी अधिकार सुरक्षित रहेंगे, लेकिन वे ध्वस्तीकरण में देरी का आधार नहीं बनेंगे।

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