फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Public interest litigation filed against private individuals seeking removal of encroachment is no

High Court : निजी व्यक्तियों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की मांग में दायर जनहित याचिका पोषणीय नहीं

Tue, 06 Jan 2026 02:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 06 Jan 2026 02:36 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के एक कब्रिस्तान में निजी व्यक्तियों की ओर से किए गए कथित अतिक्रमण और नमाज पढ़ने में बाधा डालने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। कहा, निजी व्यक्तियों के खिलाफ इस प्रकार की याचिका विचारणीय नहीं है।

विज्ञापन
High Court: Public interest litigation filed against private individuals seeking removal of encroachment is no
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के एक कब्रिस्तान में निजी व्यक्तियों की ओर से किए गए कथित अतिक्रमण और नमाज पढ़ने में बाधा डालने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। कहा, निजी व्यक्तियों के खिलाफ इस प्रकार की याचिका विचारणीय नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने दिया है।

विज्ञापन


याची अशरफ अंसारी की ओर से गाजीपुर के अवथही बसंत, मोहम्मदाबाद में प्लॉट संख्या-31 को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। याची का आरोप था कि स्थानीय ओम प्रकाश राय व अमित राय ने कब्रिस्तान की जमीन पर अतिक्रमण कर रहे हैं। बांस और लकड़ी के ढांचे खड़े कर मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। 
विज्ञापन


कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यह विवाद निजी व्यक्तियों के बीच का है। इसमें किसी वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य का उल्लंघन नहीं पाया गया। इसलिए निजी व्यक्तियों के खिलाफ परमादेश जारी नहीं किया जा सकता। एसडीएम रिपोर्ट में मौके पर किसी भी प्रकार के स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण की पुष्टि नहीं हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण और प्रार्थना के अधिकार जैसे मुद्दे तथ्यों के विवादित प्रश्न हैं, जिन्हें रिट अधिकार क्षेत्र के तहत तय नहीं किया जा सकता। राजस्व अभिलेखों में जमीन ईदगाह या मस्जिद के रूप में दर्ज नहीं है, बल्कि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। याची वहां नमाज पढ़ने का अधिकार जताते हैं तो उन्हें इसे उचित मंच पर साबित करना होगा। कोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर दी। हालांकि, याची को कानून के अनुसार अन्य उपलब्ध कानूनी उपचारों का सहारा लेने की छूट दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed