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high court: प्रमुख सचिव सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के प्रशासक नियुक्त
Mon, 25 Jan 2021 08:10 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 25 Jan 2021 08:10 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने का आदेश देने से इंकार करते हुए अपर प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ के 30 सितम्बर 20 के आदेश को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने प्रमुख सचिव को प्रशासक नियुक्त कर 28 फरवरी तक बोर्ड का चुनाव कराकर चार्ज सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 30 सितंबर का आदेश रद्द होने से इस दौरान लिए गए फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले वैध माने जाएंगे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने नसीमुद्दीन व अन्य की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि बोर्ड का चुनाव पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के पहले करा लिया जाना चाहिए। एक अप्रैल 20 को कार्यकाल समाप्त हो गया। कोविड 19 के कारण छह माह के लिए कार्यकाल बढाया गया। इसके बाद भी चुनाव न कराकर कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
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ऐसा करने का राज्य सरकार को अधिकार नहीं है। छह सौ से कम वोटर हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के जरिये चुनाव कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने की अधिकारिता नहीं है।
ऐसी आपात आवश्यकता नहीं थी, जिससे कार्यकाल बढ़ाना अपरिहार्य था। सरकार का कहना था कि कोविड संक्रमण के चलते डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने जिसे नहीं माना और चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने प्रमुख सचिव को प्रशासक नियुक्त कर 28 फरवरी तक बोर्ड का चुनाव कराकर चार्ज सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 30 सितंबर का आदेश रद्द होने से इस दौरान लिए गए फैसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले वैध माने जाएंगे। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने नसीमुद्दीन व अन्य की याचिका पर दिया है।
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याची का कहना था कि बोर्ड का चुनाव पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के पहले करा लिया जाना चाहिए। एक अप्रैल 20 को कार्यकाल समाप्त हो गया। कोविड 19 के कारण छह माह के लिए कार्यकाल बढाया गया। इसके बाद भी चुनाव न कराकर कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है।
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ऐसा करने का राज्य सरकार को अधिकार नहीं है। छह सौ से कम वोटर हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के जरिये चुनाव कराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को बोर्ड का कार्यकाल बढ़ाने की अधिकारिता नहीं है।
ऐसी आपात आवश्यकता नहीं थी, जिससे कार्यकाल बढ़ाना अपरिहार्य था। सरकार का कहना था कि कोविड संक्रमण के चलते डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कार्यकाल बढ़ाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने जिसे नहीं माना और चुनाव कराने का निर्देश दिया है।