फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Petition challenging the Land Record Manual dismissed; 10 thousand rupees fine imposed on the petitioner

हाईकोर्ट : लैंड रिकॉर्ड मैनुअल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, याची पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना 

Sun, 17 Apr 2022 12:15 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 17 Apr 2022 12:15 AM IST
विज्ञापन
High Court: Petition challenging the Land Record Manual dismissed; 10 thousand rupees fine imposed on the petitioner
allahabad high court - फोटो : social media

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लैंड रिकॉर्ड मैनुअल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में यूपी भूमि रिकॉर्ड मैनुअल को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 और राजस्व संहिता नियम, 2016 के खिलाफ मानते हुए असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने शैलेश कुमार मिश्रा की याचिका को सुनवाई योग्य न होने के कारण 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।

विज्ञापन



उत्तर प्रदेश भूमि अभिलेख नियमावली भूमि अभिलेखों की तैयारी और रख-रखाव के लिए नियम और प्रक्रियाएं प्रदान करती है। दूसरी ओर यूपी राजस्व संहिता, 2006 को उत्तर प्रदेश राज्य में भूमि काश्तकार और भू-राजस्व से संबंधित कानून को समेकित और संशोधित करने, उससे जुड़े और उसके आनुषंगिक मामलों के लिए प्रख्यापित किया गया है।
विज्ञापन



कोर्ट के सामने याची ने सामाजिक कार्यकर्ता और किसान के रूप में रुख किया था। उसके द्वारा यह तर्क दिया गया कि जनहित याचिका जनता के सामान्य हित के लिए यूपी भूमि अभिलेख नियमावली एक पुराना नियमावली है और यूपी राजस्व संहिता, 2006 के अनुसार नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन



दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस आधार पर जनहित याचिका का विरोध किया। उसने कहा कि याचिका में भूमि रिकॉर्ड मैनुअल को चुनौती नहीं दी जा सकती। कहा गया कि अधिनियम के प्रावधानों को केवल दो आधारों पर असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जा सकता है। पहला विधायी क्षमता की कमी के कारण और दूसरा किसी अन्य संवैधानिक प्रावधान के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने के कारण।


कोर्ट ने कहा कि उसे एक भी शब्द नहीं मिला जो यह बता सके कि याचिकाकर्ता एक ऐसा व्यक्ति है जो सीधे तौर पर पीड़ित है। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में सक्षम नहीं है कि मैनुअल को विधायी क्षमता के बिना लाया गया है।


नियमावली के अधिकार के संबंध में कोर्ट ने विशेष रूप से देखा कि यूपी भूमि अभिलेख नियमावली केवल भूमि अभिलेखों को बनाए रखने के तरीके और प्रक्रिया प्रदान करती है। कोर्ट ने आगे कहा कि यूपी राजस्व संहिता, 2006 की धारा 234(3) में प्रावधान है कि राजस्व संहिता, 2006 के प्रारंभ होने की तिथि पर लागू भूमि अभिलेख नियमावली उस सीमा तक लागू रहेगी जब तक कि वे राजस्व संहिता, 2006 के प्रावधानों के साथ असंगत नहीं हैं।



कोर्ट ने कहा कि हमारी नजर में यह उपयुक्त मामला नहीं है, जहां जनहित याचिका क्षेत्राधिकार को लागू किया जाना चाहिए। न्यायालय ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर याचिका को खारिज कर दिया। याची को जुर्माने की राशि आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति, इलाहाबाद के पास जमा करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed