हाईकोर्ट : पुलिसकर्मी की सेवा बहाली का आदेश, दृष्टि दोष के चलते कर दिया गया था बर्खास्त
याची का चयन सिपाही पद पर पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से किया गया था। उसके खिलाफ कुछ शिकायत होने पर जांच बैठाई गई। याची में दृष्टि दोष पाए जाने पर तीन सितंबर 2007 के आदेश के तहत उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। याची ने सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती दी। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड गठित कर फिर से परीक्षण का आदेश दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 वर्ष पूर्व दृष्टि दोष के चलते बर्खास्त किए गए सिपाही की सेवा बहाली का आदेश देते हुए एसपी इटावा के 24 सितंबर 2009 के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि सिपाही को सभी लाभ प्रदान किए जाएं और उसकी सेवा बहाल की जाए। पुलिस विभाग इस पर कोई आपत्ति नहीं करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने याची जगत नारायण की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याची का चयन सिपाही पद पर पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से किया गया था। उसके खिलाफ कुछ शिकायत होने पर जांच बैठाई गई। याची में दृष्टि दोष पाए जाने पर तीन सितंबर 2007 के आदेश के तहत उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। याची ने सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती दी। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड गठित कर फिर से परीक्षण का आदेश दिया।
मेडिकल बोर्ड ने जांच में पाया कि याची को दृष्टि दोष है। मेडिकल बोर्ड के आधार पर एसपी इटावा ने 24 सितंबर 2009 के आदेश से याची को बर्खास्त कर दिया। याची ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और एसपी इटावा के आदेश और पूर्व में सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द करने की मांग की।
याची की ओर से कहा गया कि भर्ती के दौरान उसमें दृष्टि दोष नहीं था। कोर्ट ने भी इस बात को माना और कहा कि भर्ती के समय दृष्टि दोष को देखना मेडिकल बोर्ड का काम था। याची में सेवा के दौरान यह दिक्कत हुई है। पुलिस विभाग को याची की परिस्थितियों को देखते हुए काम सौंपना था। यदि उसे हटाया जाता तो नियमों का पालन किया जाता।