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हाईकोर्ट : पूर्व लाइब्रेरियन के खिलाफ फिर से सुनवाई के आदेश
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मानहानि के मामले में पूर्व लाइब्रेरियन के खिलाफ फिर से होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने डॉ. संजीव सराफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश
वाराणसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व लाइब्रेरियन प्रो. हरि नारायण प्रसाद के खिलाफ दर्ज मानहानि के मामले की सुनवाई फिर से करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सत्र न्यायालय नए सिरे से मामले की सुनवाई करे और आदेश पारित करे। यह आदेश न्यायमूर्ति उमेश कुमार की पीठ ने डॉ. संजीव सराफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने मामले में सत्र न्यायालय के 22 फरवरी 2021 को पारित आदेश को भी रद्द कर दिया। कहा कि सत्र न्यायालय का यह आदेश एकतरफा है। सत्र न्यायालय ने सुनवाई केदौरान याची को न तो नोटिस जारी किया और न ही याची का पक्ष जाना। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत माना और कहा कि सत्र न्यायालय फिर से मामले की सुनवाई करे।
मामले में डॉ. संजीव ने पूर्व लाइब्रेरियन के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 17 अगस्त 2019 को आदेश पारित किया था। पूर्व लाइब्रेरियन ने न्यायिक मजिस्ट्रेट केआदेश केखिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की थी। याची की ओर से तर्क दिया गया कि सत्र न्यायालय ने सुनवाई केदौरान उसका पक्ष नहीं सुना और एक तरफा आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने भी यह पाया कि सत्र न्यायालय ने याची को न तो नोटिस जारी किया और न ही उसका पक्ष जाना। इस आधार पर कोर्ट ने सत्र न्यायालय केआदेश को रद्द कर दिया और नए सिरे से मामले की सुनवाई का आदेश दिया।
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हाईकोर्ट ने डॉ. संजीव सराफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश
वाराणसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व लाइब्रेरियन प्रो. हरि नारायण प्रसाद के खिलाफ दर्ज मानहानि के मामले की सुनवाई फिर से करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सत्र न्यायालय नए सिरे से मामले की सुनवाई करे और आदेश पारित करे। यह आदेश न्यायमूर्ति उमेश कुमार की पीठ ने डॉ. संजीव सराफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने मामले में सत्र न्यायालय के 22 फरवरी 2021 को पारित आदेश को भी रद्द कर दिया। कहा कि सत्र न्यायालय का यह आदेश एकतरफा है। सत्र न्यायालय ने सुनवाई केदौरान याची को न तो नोटिस जारी किया और न ही याची का पक्ष जाना। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत माना और कहा कि सत्र न्यायालय फिर से मामले की सुनवाई करे।
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मामले में डॉ. संजीव ने पूर्व लाइब्रेरियन के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 17 अगस्त 2019 को आदेश पारित किया था। पूर्व लाइब्रेरियन ने न्यायिक मजिस्ट्रेट केआदेश केखिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की थी। याची की ओर से तर्क दिया गया कि सत्र न्यायालय ने सुनवाई केदौरान उसका पक्ष नहीं सुना और एक तरफा आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ने भी यह पाया कि सत्र न्यायालय ने याची को न तो नोटिस जारी किया और न ही उसका पक्ष जाना। इस आधार पर कोर्ट ने सत्र न्यायालय केआदेश को रद्द कर दिया और नए सिरे से मामले की सुनवाई का आदेश दिया।
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