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हाईकोर्ट का आदेश : ड्यूटी से गायब रहने के आरोपी सीआरपीएफ जवान की गिरफ्तारी पर रोक

Wed, 17 Nov 2021 09:01 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 17 Nov 2021 09:01 PM IST
सार

केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब, रायपुर में तैनात जवान को दस दिन में ड्यूटी पर उपस्थित होने का निर्देश।

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High Court order: Ban on arrest of CRPF jawan accused of missing from duty
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रायपुर छत्तीसगढ़ में तैनात गोरखपुर के मूल निवासी सीआरपीएफ जवान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और केंद्र तथा राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले जवान को दस दिन के भीतर ड्यूटी पर उपस्थत होने का निर्देश दिया है। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो अंतरिम आदेश रद्द मान लिया जाएगा। 

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सीआरपीएफ जवान कैलाश नाथ उपाध्याय की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति सौरभ विद्यार्थी की खंडपीठ ने दिया है। याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि याची 65वीं बटालियन सीआरपीएफ रायपुर छत्तीसगढ़ में तैनात है। 19 जून 2021 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व कमाडेंट ने याची के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी कर एसएसपी गोरखपुर को निर्देश दिया है कि याची को गिरफ्तार कर उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाए। 

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High Court order: Ban on arrest of CRPF jawan accused of missing from duty
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार की ओर से अपर सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति करते हुए कहा है कि मामला छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले का है। घटनाक्रम वहीं है, इसलिए इस अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं है। याची के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याची गोरखपुर का मूल निवासी है। वह 15 दिन की छुट्टी पर अपने घर आया था। उसकी छ़ुट्टी सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत की गई थी।

छुट्टी पर रहने के दौरान याची गंभीर रूप से बीमार हो गया। उसने सरकारी अस्पताल में इलाज कराया। इसकी सूचना रजिस्टर्ड डाक से सक्षम प्राधिकारी को भेजी थी। याची पर बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के सेक्शन 10 एम के तहत कार्रवाई की गई है। अधिवक्ता का कहना था कि याची का अपराध बेहद मामूली है और मात्र एक वर्ष की सजा से दंडनीय है। 

कोर्ट ने याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा है कि यदि याची दस दिन के भीतर ड्यूटी पर उपस्थित हो जाता है तो उसे गिरफ्तार न किया जाए। साथ ही केंद्र व राज्य सरकारों सहित सभी पक्षकारों से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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