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यूपी : हाईकोर्ट की टिप्पणी- सोशल मीडिया की चैट पत्नी की पवित्रता कलंकित करने का आधार नहीं, पति की याचिका खारिज

Sat, 03 Oct 2026 06:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 03 Oct 2026 06:50 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि महज सोशल मीडिया चैट, पेशेवर बातचीत या संदेह के आधार पर पत्नी को व्यभिचारी नहीं माना जा सकता। ऐसी अपुष्ट चैट के आधार पर उसे भरण-पोषण के अधिकार से भी वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चंदौसी निवासी पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए संभल परिवार न्यायालय के भरण-पोषण संबंधी आदेश को बरकरार रखा।

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High Court observes that social media chats are not grounds to cast aspersions on a wife's chastity
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल सोशल मीडिया की चैट पत्नी की पवित्रता कलंकित करने का आधार नहीं हो सकती। न ही इस आधार पर उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित किया जा सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की एकल पीठ ने पत्नी को भरण-पोषण देने वाले संभल के परिवार न्यायालय के आदेश पर मुहर लगा दी। पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर कोर्ट ने कहा कि पत्नी को भरण-पोषण से वंचित करने के लिए उसे आदतन व्यभिचारी साबित करना होगा।

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कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर बातचीत जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का विधिवत पुष्ट होना जरूरी है। सोशल मीडिया पर बातचीत से शारीरिक अंतरंगता साबित नहीं हो सकती। चंदौसी निवासी पति ने परिवार न्यायालय की ओर से अलग रह रही पत्नी को भरण-पोषण देने वाले आदेश को चुनौती दी थी। पति ने इंस्टाग्राम पर की गई बातचीत के प्रिंटआउट पेश किए।

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दावा किया कि उसकी पत्नी का एक वकील के साथ अवैध संबंध है। लिहाजा, वह भरण-पोषण पाने के योग्य नहीं है। कोर्ट ने इन दलीलों और सबूतों को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि केवल बातचीत, पेशेवर संबंध या संदेह से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पत्नी आदतन व्यभिचारी है। संवाद

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डिजिटल साक्ष्य का सत्यापन जरूरी

डिजिटल साक्ष्य की विश्वसनीयता साबित करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत वैधानिक प्रमाणपत्र जरूरी है। मौजूदा मामले में पति यह प्रमाणपत्र पेश करने में विफल रहा। लिहाजा, अपुष्ट सोशल मीडिया चैट को पत्नी की अपवित्रता का आधार बना कर भरण-पोषण देने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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