High Court : विभागीय गलती से अधिक वेतन भुगतान की वसूली नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की तरफ से दाखिल विशेष अपील की सुनवाई करते हुए दिया है। अपील पर राज्य सरकार के अधिवक्ता तेजभान पांडेय व विपक्षी सेवानिवृत्त कांस्टेबल शशांक शेखर तिवारी के अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर ने पक्ष रखा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग द्वारा निर्धारित गलत वेतनमान का भुगतान होने के बाद सेवानिवृत्ति परिलाभों से वसूली आदेश को रद्द करने के एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह केस के निर्णय के आलोक में एकलपीठ का फैसला सही है। इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र तथा न्यायमूर्ति एसक्यूएच रिजवी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की तरफ से दाखिल विशेष अपील की सुनवाई करते हुए दिया है। अपील पर राज्य सरकार के अधिवक्ता तेजभान पांडेय व विपक्षी सेवानिवृत्त कांस्टेबल शशांक शेखर तिवारी के अधिवक्ता बीएन सिंह राठौर ने पक्ष रखा।
मालूम हो कि विपक्षी सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद पुलिस में भर्ती हुआ। 30 सितंबर 2010 को वेतनमान निर्धारण में उसकी सेना की सेवा को शामिल कर लिया गया और उसे अधिक वेतनमान दिया जाने लगा। वह 31 अगस्त 20 को पुलिस से सेवानिवृत्त हो गए। सहायक लेखाधिकारी पुलिस मुख्यालय लखनऊ के आदेश से वेतन निर्धारण में सेना की सेवा जोड़ने को सही नहीं माना गया।
ऐसे में 14 लाख 30 हजार 067 रुपये अधिक वेतन भुगतान के सेवानिवृति परिलाभों से समायोजित करने का निर्देश दिया गया। जिसे याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मानते हुए चुनौती दी गई। एकलपीठ ने सरकार के आदेश को गलत करार देते हुए वसूली आदेश रद्द कर दिया। जिसको अपील में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। कहा गलत वेतन निर्धारण में कर्मचारी की कोई भूमिका नहीं है। उसने कोई फ्राड नहीं किया है। न ही गलत भुगतान की वसूली की सहमति दी है। इसलिए अधिक भुगतान की वसूली नहीं की जा सकती।