फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court news

पॉक्सो की हर जमानत याचिका को खारिज करना ट्रायल कोर्ट का पूर्वाग्रह: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jul 2024 03:00 AM IST
विज्ञापन
High Court news
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक होने व बयान में सहमति से संबंध बनाने की बात स्वीकारने के बाद भी ट्रायल कोर्ट जमानत देने से इन्कार कर रहे हैं। यह ट्रायल कोर्ट के पूर्वाग्रह को दर्शाता है। न्यायमूर्ति अजय भनोट की कोर्ट ने दुष्कर्म व पॉक्सो के आरोपी अनुरुद्ध की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। याची अधिवक्ता फख्र उज जमां और अपर शासकीय अधिवक्ता परितोष कुमार मालवीय ने पक्ष रखा।
विज्ञापन

मामले में जालौन निवासी अनुरुद्ध पर कोतवाली उरई में पॉक्सो, दुष्कर्म सहित अन्य मामलों मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि उसने नाबालिग को बहला-फुसला कर भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी पांच अगस्त 2023 से जेल में है। ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
विज्ञापन

याची अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से अधिक है। उसने अपनी मर्जी से युवक संग संबंध बनाए हैं। पीड़िता ने अपने बयानों में आरोपी के खिलाफ अपहरण, गलत तरीके से हिरासत में रखने, दुष्कर्म का कोई आरोप नहीं लगाया है। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने इसका विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने व तथ्यों का अध्ययन करने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
विज्ञापन
विज्ञापन

जमानत खारिज करके इमानदार बनने की मानसिकता बदलनी होगी
न्यायाधीश ने कहा कि अगर ट्रायल कोर्ट की ऐसी मानसिकता है कि पॉक्सो मामलों में जमानत खारिज करके ही इमानदारी दिखाई जा सकता है तो इसे बदलना होगा। जिला न्यायाधीशों को उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाने चाहिए। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस आदेश की एक प्रति निदेशक, न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, लखनऊ व विद्वान जिला न्यायाधीशों को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी जाए।

उच्च न्यायालय को अभिभावक की तरह ट्रायल कोर्ट को मजबूत करना चाहिए
कोर्ट ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय को ट्रायल कोर्ट को डराना नहीं चाहिए,बल्कि एक अभिभावक की तरह उसे मजबूत करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि ट्रायल न्यायाधीशों की स्वायत्तता बनी रहे और वह स्वतंत्र व निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकें। इसकी देखरेख के लिए संविधान ने हाईकोर्ट को बड़ी जिम्मेदारी दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed