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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Mature are masters of their own will, can live with the person of their choice

High Court : बालिग अपनी मर्जी की मालिक, पसंद के व्यक्ति संग रह सकती है, सीडीब्लूसी का आदेश रद्द

Sun, 04 Jan 2026 01:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 04 Jan 2026 01:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहजहांपुर की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के आदेश को गलत ठहराते हुए लखनऊ के महिला आश्रय गृह में निरुद्ध महिला को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

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High Court: Mature are masters of their own will, can live with the person of their choice
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहजहांपुर की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के आदेश को गलत ठहराते हुए लखनऊ के महिला आश्रय गृह में निरुद्ध महिला को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा बालिग अपनी मर्जी की मालिक है। वह जहां चाहे, वहां जा सकती है। अपनी पसंद के व्यक्ति संग रह सकती है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने याची पति की ओर से महिला आश्रय गृह में निरुद्ध पत्नी की रिहाई के लिए दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। कोर्ट ने सीडब्ल्यूसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। कहा कि मामले में उम्र निर्धारण के लिए कोई विधिसम्मत और उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। समिति ने केवल स्कूल रिकॉर्ड की फोटो कॉपी पर भरोसा किया।
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न तो मूल अभिलेख देखे गए और न ही स्कूल के प्रधानाचार्य से कोई प्रमाण लिया गया। यह भी जांच नहीं की गई कि जन्मतिथि स्कूल रिकॉर्ड में कब, कैसे और किसके निर्देश पर दर्ज हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि याची ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उम्र 19 वर्ष से अधिक बताई थी, जबकि स्कूल रिकॉर्ड में उसे नाबालिग दर्शाया गया। ऐसे विरोधाभास की स्थिति में समुचित जांच करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई।
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दलील : कोर्ट ने पहले ही गिरफ्तारी से रोका था

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि महिला अपनी मर्जी से माता-पिता का घर छोड़कर पति के साथ रहना चाहती है। वह आर्य समाज मंदिर, बरेली में विवाह कर चुकी है। इसके बावजूद पिता ने उसे नाबालिग बताते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि याची पति पत्नी को गिरफ्तार न किया जाए।

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