High Court : जगपाल हत्याकांड में दोषी प्रवेश की आजीवन कारावास की सजा बरकरार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के जगपाल हत्याकांड में एकमात्र जीवित बचे दोषी प्रवेश की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के जगपाल हत्याकांड में एकमात्र जीवित बचे दोषी प्रवेश की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय व न्यायमूर्ति डॉ.अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने दिया है। अभियोजन के अनुसार महिपाल और आरोपी पक्ष के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था।
10 अप्रैल 1998 को महिपाल का बेटा जगपाल रिश्तेदार श्रीओम के साथ साइकिल से हापुड़ जा रहा था। आरोप है कि रास्ते में आरोपियों ने घेर कर लाठी, तमंचे और चाकू से हमला कर उसकी हत्या कर दी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषी ठहराए गए प्रवेश व अन्य ने हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर की थी। प्रवेश के अलावा अन्य की मौत हो जाने से उनकी अपील समाप्त हो गई थी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मुख्य प्रत्यक्षदर्शी गवाह रोहताश को अदालत में पेश नहीं किया गया। गवाहों के बयानों और चिकित्सीय साक्ष्यों में विरोधाभास हैं। ऐसे में अभियोजन की कहानी संदिग्ध है। वहीं, राज्य के वकील ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता की दलीलें खारिज कर दीं। प्रत्यक्षदर्शी महिपाल और श्रीओम की गवाही को विश्वसनीय माना।