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हाईकोर्ट सख्त : अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर का चलना खतरा ही नहीं, लोगों के साथ अन्याय भी है

Sat, 21 Dec 2024 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 21 Dec 2024 08:07 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने राम पांडेय की याचिका पर दिया। गोरखपुर के गुलरिहा थाने में डॉ. राहुल नायक ने 17 मई 2024 को याची राम पांडेय पर धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया।

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High Court is strict: Running of illegal diagnostic centers is not only a danger but also an injustice to the
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर का चलना खतरा ही नहीं, बल्कि लोगों के साथ अन्याय भी है। कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी कर गोरखपुर के याची की अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली। वहीं, एसएसपी को निर्देश दिया कि मामले में तुरंत जांच आगे बढ़ाएं। अगली तारीख पर इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने राम पांडेय की याचिका पर दिया। गोरखपुर के गुलरिहा थाने में डॉ. राहुल नायक ने 17 मई 2024 को याची राम पांडेय पर धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि मेरी डिग्री का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर कई जिलों में अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर चला रहे हैं। याची ने गिरफ्तारी से बचने को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, इस पर कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम आदेश तक रोक लगा दी थी।
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कोर्ट के मांगे जाने पर एसएसपी ने हलफनामा प्रस्तुत कर बताया कि प्रथम दृष्टया डायग्नोस्टिक खोलने के लिए याची ने शिकायतकर्ता डॉक्टर की डिग्री, पैन कार्ड और फोटो का गलत इस्तेमाल किया है। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अभ्युदय मेहरोत्रा व अश्वनी श्रीवास्तव ने पूरक हलफनामा देकर बताया कि डॉक्टर ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से रेडियोलॉजी में स्नातकोत्तर किया है। जबकि, सेंटर के लिए आरोपी ने लखनऊ विश्वविद्यालय की डिग्री लगाई। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध स्पष्ट है। इस पर याची को दी गई सुरक्षा वापस ले ली और पुलिस अधीक्षक को कानून के अनुसार कार्रवाई का निर्देश दिया।

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