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हाईकोर्ट सख्त : सिविल लाइंस के बदले करछना में जमीन दे दी जाए तो कैसा लगेगा, डीएम प्रयागराज से कोर्ट ने पूछा

Fri, 04 Oct 2024 03:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 04 Oct 2024 03:05 PM IST
सार

हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को डीएम रविंद्र कुमार मंदर व अन्य अधिकारी हाजिर हुए। उन्होंने हलफनामा दिया कि किसानों की सहमति से उनकी जमीन दूसरी जगह शिफ्ट की गई है। कोर्ट ने हलफनामे पर याची को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही अधिकारियों को व्यक्तिगत हाजिरी से राहत देते हुए अगली तिथि 24 अक्तूबर नियत की है।

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High Court is strict: How would you feel if land is given in Karchana in exchange of Civil Lines
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

अगर सिविल लाइंस की जमीन लेकर बदले में आपको करछना में जमीन दे दी जाए, तो कैसा लगेगा? प्रयागराज डीएम से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह सवाल करछना पावर प्लांट जमीन अधिग्रहण मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पूछा।

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हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को डीएम रविंद्र कुमार मंदर व अन्य अधिकारी हाजिर हुए। उन्होंने हलफनामा दिया कि किसानों की सहमति से उनकी जमीन दूसरी जगह शिफ्ट की गई है। कोर्ट ने हलफनामे पर याची को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही अधिकारियों को व्यक्तिगत हाजिरी से राहत देते हुए अगली तिथि 24 अक्तूबर नियत की है।
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न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय की कोर्ट रामहित मिश्रा व 29 अन्य की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है। बता दें कि मामले में कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज, विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी प्रयागराज व अधिशासी अभियंता वितरण एवं सर्कुलेशन डिवीजन विद्युत विभाग प्रयागराज को तलब किया था।
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मामले के अनुसार बसपा शासनकाल (2007-12) में पावर प्लांट के लिए कचरी, कचरा, देवरी कला, गढ़वा कला, देहली, पनासा समेत कुल आठ गांव के 1300 किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी। पावर प्लांट लगाने की जिम्मेदारी जेपी समूह को दी गई। ज्यादातर किसानों को जमीन का भुगतान कर दिया गया। कुछ किसानों ने मुआवजा नहीं लिया। भूमिपूजन के दौरान जेपी समूह के अधिकारियों से कुछ किसानों ने नौकरी व अन्य सुविधाओं की बात की। कंपनी ने इन्कार कर दिया।


इस पर 29 किसान हाईकोर्ट चले गए और प्लांट नहीं लग पाया। कुछ साल बाद सपा की सरकार बनी। उसने भी किसानों को मनाना चाहा लेकिन बात नहीं बनी। किसानों के लगातार प्रदर्शन को देखते हुए जेपी समूह ने पावर प्लांट लगाने से मना कर दिया। कोर्ट गए किसानों की जमीन दूसरे ग्राम सभा में स्थानांतरित करने के मामले में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई है।

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