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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Investigating officer fails to find blood stains, acquits accused in case of death due to gunshot

High Court : जांच अधिकारी को नहीं मिले खून के दाग, घर के भीतर गोली लगने से मौत के मामले में आरोपी बरी

Wed, 03 Dec 2025 02:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 03 Dec 2025 02:53 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों का बयान है कि घर के अंदर गोली मारकर हत्या की गई। वहीं, जांच अधिकारी को घर के अंदर खून के दाग नहीं मिले। इस विरोधाभास ने अभियोजन की कहानी को अविश्वसनीय बना दिया।

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High Court: Investigating officer fails to find blood stains, acquits accused in case of death due to gunshot
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों का बयान है कि घर के अंदर गोली मारकर हत्या की गई। वहीं, जांच अधिकारी को घर के अंदर खून के दाग नहीं मिले। इस विरोधाभास ने अभियोजन की कहानी को अविश्वसनीय बना दिया। अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने हत्या मामले के चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा, न्यायमूर्ति मदनपाल सिंह की खंडपीठ ने कमलेश तिवारी व दो अन्य की आपराधिक अपील पर दिया है।

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प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र में 2010 को दयाशंकर तिवारी की गोली लगने से हुई मौत मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता विनय तिवारी ने आरोप लगाया था कि चुनावी रंजिश में राकेश तिवारी, कमलेश तिवारी, नागेश्वर तिवारी, वेदमणि तिवारी व अन्य ने गोली मारकर हत्या की घटना को अंजाम दिया। ट्रायल कोर्ट ने चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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अभियोजन पक्ष की ओर से मुख्य गवाह विनय तिवारी व विधान चंद्र ने अपनी गवाही में दावा किया था कि आरोपी व्यक्तियों ने चुनावी रंजिश के चलते उनके घर में घुसकर हमला किया था। उन्होंने कहा कि गोली लगने के बाद मृतक दया शंकर तिवारी और घायल विधान चंद्र तिवारी घर के भीतर गैलरी में गिर गए थे। वहीं, जांच अधिकारी ने घर के अंदर खून के दाग न पाए जाने की बात कही। कोर्ट ने विरोधाभासों और संदेह का लाभ देते हुए कमलेश तिवारी, राकेश तिवारी, नागेश्वर तिवारी और वेद मणि तिवारी को बरी कर दिया। 

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