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शासनादेश को हाईकोर्ट की हरी झंडी
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:52 AM IST
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बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अध्यापिकाओं को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने छह जुलाई को जारी शासनादेश को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि स्थानांतरण के लिए अध्यापिकाओं से ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएं। इसके बाद ही स्थानांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि स्थानांतरण में पूरी पारदर्शिता रखी जाए तथा, यदि किसी अधिकारी द्वारा इसमें गड़बड़ी करने की शिकायत मिलती है तो उच्च अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करें। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षिकाओं के उनके पति के तैनाती वाले जिले या ससुराल के जिले में तबादले का रास्ता साफ हो गया है।
विभा सिंह कुशवाहा, रीना यादव सहित करीब 1700 याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया। याचिकाओं पर अधिवक्ता इंद्रसेन, सीमांत सिंह, विभू राय, अनिल बिसेन, एके त्रिपाठी, सत्येंद्र नाथ तिवारी सहित तमाम वकीलों ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि पांच फरवरी को अपर मुख्य सचिव बेसिक के शासनादेश पर छह फरवरी को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने परिपत्र जारी कर पत्रांक में शिक्षिकाओं के अंतरजनपदीय तबादले के लिए पांच वर्ष की न्यूनतम तैनाती की अर्हता समाप्त कर दी है। नियम 8(2)(डी) (विशेष परिस्थिति) के तहत आनी वाली शिक्षिकाएं अपने पति/ससुराल के जिले में स्थानांतरण हेतु आवेदन कर सकेंगी।
इनसे ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करने के बाद उस पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के शपथपत्र के आधार पर याचिकाएं निस्तारित करते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
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विभा सिंह कुशवाहा, रीना यादव सहित करीब 1700 याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दिया। याचिकाओं पर अधिवक्ता इंद्रसेन, सीमांत सिंह, विभू राय, अनिल बिसेन, एके त्रिपाठी, सत्येंद्र नाथ तिवारी सहित तमाम वकीलों ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि पांच फरवरी को अपर मुख्य सचिव बेसिक के शासनादेश पर छह फरवरी को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने परिपत्र जारी कर पत्रांक में शिक्षिकाओं के अंतरजनपदीय तबादले के लिए पांच वर्ष की न्यूनतम तैनाती की अर्हता समाप्त कर दी है। नियम 8(2)(डी) (विशेष परिस्थिति) के तहत आनी वाली शिक्षिकाएं अपने पति/ससुराल के जिले में स्थानांतरण हेतु आवेदन कर सकेंगी।
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इनसे ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करने के बाद उस पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के शपथपत्र के आधार पर याचिकाएं निस्तारित करते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
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