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पीएम केयर्स फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक नेता को हाईकोर्ट ने दी राहत
Thu, 10 Sep 2020 07:13 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 10 Sep 2020 07:13 PM IST
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pm cares fund
- फोटो : social media
सोशल मीडिया पर पीएम और सीएम केयर फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक नेता को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए इस मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी है।
यह आदेश शिक्षक नेता नंद लाल यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति अनिल कुमार नवम की पीठ ने दिया। याची की ओर से अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की।
एटा के मिरहची थाना क्षेत्र में स्थित इंटर कालेज के प्रधानाचार्य व शिक्षक नेता नंद लाल यादव ने पीएम केयर फंड की पारदर्शिता को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। जिसका संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देश पर मिरहची थाने की पुलिस ने आई टी एक्ट की धारा 66 ए के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
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जिसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि धारा 66 ए आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने पर सुप्रीमकोर्ट ने रोक लगाई है। इसके बावजूद यूपी पुलिस इस धारा में मुकदमे दर्ज कर रही है। कोर्ट ने एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मानते हुए विवेचना अधिकारी को मय रिकॉर्ड के तलब किया था।
अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि आईटी एक्ट की धारा 66 ए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन है और श्रेया सिंघल के चर्चित केस में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66 ए को गैरकानूनी घोषित कर दिया था बावजूद इसके उत्तर प्रदेश की पुलिस निरस्त धारा 66ए के तहत मुकदमा दर्ज कर आम लोगों को प्रताड़ित कर रही है। कोर्ट ने प्राथमिकी रद़द कर दी है।
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यह आदेश शिक्षक नेता नंद लाल यादव की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति अनिल कुमार नवम की पीठ ने दिया। याची की ओर से अधिवक्ता सुनील यादव ने बहस की।
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एटा के मिरहची थाना क्षेत्र में स्थित इंटर कालेज के प्रधानाचार्य व शिक्षक नेता नंद लाल यादव ने पीएम केयर फंड की पारदर्शिता को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। जिसका संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देश पर मिरहची थाने की पुलिस ने आई टी एक्ट की धारा 66 ए के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
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जिसके खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि धारा 66 ए आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने पर सुप्रीमकोर्ट ने रोक लगाई है। इसके बावजूद यूपी पुलिस इस धारा में मुकदमे दर्ज कर रही है। कोर्ट ने एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मानते हुए विवेचना अधिकारी को मय रिकॉर्ड के तलब किया था।
अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि आईटी एक्ट की धारा 66 ए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन है और श्रेया सिंघल के चर्चित केस में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 66 ए को गैरकानूनी घोषित कर दिया था बावजूद इसके उत्तर प्रदेश की पुलिस निरस्त धारा 66ए के तहत मुकदमा दर्ज कर आम लोगों को प्रताड़ित कर रही है। कोर्ट ने प्राथमिकी रद़द कर दी है।