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Prayagraj News: आवासीय प्लॉट पर अस्पताल संचालन मामले में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा सेक्टर-45 स्थित आवासीय भूखंड पर कथित रूप से अस्पताल संचालित किए जाने के मामले में नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से सीलिंग आदेश और कार्रवाई के लिए समय मांगना स्वीकार्य नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने राजेश चौहान की ओर से दायर जनहित याचिका पर याचिका पर दिया।
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोएडा सेक्टर-45 के एसडी-60 प्लॉट का आवंटन आवासीय उपयोग के लिए हुआ था। पिछले कई वर्षों से वहां अस्पताल संचालित किया जा रहा है। याची का कहना है कि इससे क्षेत्र में जाम की समस्या बढ़ रही है। अस्पताल का कचरा बाहर फेंके जाने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की ओर से दलील दी गई कि संबंधित भूखंड के मालिक को कई बार नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद व्यावसायिक गतिविधि बंद नहीं किए जाने पर परिसर को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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कोर्ट ने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुसार विकास प्राधिकरण को स्वयं कार्रवाई करनी थी। ऐसे में सीलिंग आदेश पारित करने और कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय मांगना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मामले को 6 जुलाई 2026 को नए सिरे से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
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जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि नोएडा सेक्टर-45 के एसडी-60 प्लॉट का आवंटन आवासीय उपयोग के लिए हुआ था। पिछले कई वर्षों से वहां अस्पताल संचालित किया जा रहा है। याची का कहना है कि इससे क्षेत्र में जाम की समस्या बढ़ रही है। अस्पताल का कचरा बाहर फेंके जाने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सुनवाई के दौरान नोएडा प्राधिकरण की ओर से दलील दी गई कि संबंधित भूखंड के मालिक को कई बार नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद व्यावसायिक गतिविधि बंद नहीं किए जाने पर परिसर को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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कोर्ट ने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुसार विकास प्राधिकरण को स्वयं कार्रवाई करनी थी। ऐसे में सीलिंग आदेश पारित करने और कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय मांगना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मामले को 6 जुलाई 2026 को नए सिरे से सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।