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High Court : शादी के पुख्ता प्रमाण नहीं फिर भी पत्नी की तरह रह रही महिला भरण-पोषण की हकदार

Fri, 20 Feb 2026 07:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 Feb 2026 07:53 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं, लेकिन पुरुष-महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह रहते हैं तो महिला भरण-पोषण की हकदार है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

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High Court Even though there is no solid proof of marriage, woman living a wife is entitled to maintenance.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं, लेकिन पुरुष-महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह रहते हैं तो महिला भरण-पोषण की हकदार है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने परिवार न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।

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मुरादाबाद निवासी मुनीश कुमार की पत्नी ने परिवार न्यायालय में भरण-पोषण की मांग कर वाद दायर किया था। कोर्ट ने पत्नी को 12,000 और बेटे को 6,000 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया। फैसले को चुनौती देते हुए याची ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि महिला कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है। क्योंकि, उसकी शादी केवल 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर हुई है, जो हिंदू विवाह अधिनियम-1955 की धारा-7 के तहत वैध नहीं है। इस पर विपक्ष के अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने दलील दी कि महिला याची की कानूनी रूप से पत्नी है। इनका एक बेटा भी है। ऐसे में 18 हजार रुपये भरण-पोषण अधिक नहीं है।
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कोर्ट ने कहा-पुरुष को केवल कानूनी खामियों का फायदा उठाकर जिम्मेदारियों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चनमुनिया बनाम वीरेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा मामले का हवाला देते हुए कहा कि पत्नी शब्द की व्याख्या व्यापक होनी चाहिए। पुरुष को केवल कानूनी खामियों का फायदा उठाकर जिम्मेदारियों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।


पति ने इससे इन्कार नहीं किया कि बेटा उसका नहीं है। इससे यह सिद्ध होता है कि वे लिव-इन में थे। ऐसी स्थिति में भी महिला भरण-पोषण की हकदार है। याची रेलवे में लोको पायलट है। उसकी कुल शुद्ध मासिक आय लगभग 70,000 रुपये है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार पति की शुद्ध आय का 25 प्रतिशत तक भरण-पोषण के रूप में दिया जा सकता है। ऐसे में 18,000 रुपये उचित है।

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