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High Court : मामूली सी हेराफेरी भी सार्वजनिक रोजगार की पवित्रता पर प्रहार, सेवा समाप्ति के आदेश पर मुहर
Sun, 05 Apr 2026 02:48 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 05 Apr 2026 02:48 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हेराफेरी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी पाने वाले सहानुभूति के हकदार नहीं है। मामूली सी हेराफेरी भी सार्वजनिक रोजगार की निष्पक्षता और पवित्रता पर बड़ा प्रहार है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हेराफेरी और फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी पाने वाले सहानुभूति के हकदार नहीं है। मामूली सी हेराफेरी भी सार्वजनिक रोजगार की निष्पक्षता और पवित्रता पर बड़ा प्रहार है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने गोरखपुर के प्राथमिक विद्यालय में तैनात रहीं सहायक शिक्षिका प्रीति जायसवाल की सेवा समाप्ति और वेतन वसूली के आदेश को बरकरार रखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
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याची को 2010 में विशेष बीटीसी प्रशिक्षण के आधार पर प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान एसटीएफ और गोरखपुर विश्वविद्यालय की समिति ने पाया कि उनके वर्ष 2000 के स्नातक के अंकपत्र में अंकों को हेराफेरी कर बढ़ाया गया था। विवि के मूल अभिलेख के अनुसार उनके अंक कम थे। इस आधार पर बीएसए गोरखपुर ने नियुक्ति रद्द कर दी थी। साथ ही वेतन वसूली का आदेश दिया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 15 साल की बेदाग सेवा के बाद इस तरह की कार्रवाई गलत है। सेवा समाप्ति से पहले नियमित विभागीय जांच नहीं की गई। कोर्ट ने ये दलीलें सिरे से खारिज कर दीं।
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