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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Documents and circumstances do not lie... still delay in the statement of the victim is not right

High Court : दस्तावेज और परिस्थितियां झूठ नहीं बोलतीं...फिर भी पीड़िता के बयान में देरी ठीक नहीं

Sun, 18 May 2025 06:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 18 May 2025 06:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म का वीडियो बनाने के आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कहा कि मनुष्य झूठ बोल सकता है, लेकिन दस्तावेज और परिस्थितियां नहीं। फिर भी पीड़िता का बयान दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए।

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High Court: Documents and circumstances do not lie... still delay in the statement of the victim is not right
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म का वीडियो बनाने के आरोपी को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कहा कि मनुष्य झूठ बोल सकता है, लेकिन दस्तावेज और परिस्थितियां नहीं। फिर भी पीड़िता का बयान दर्ज करने में देरी नहीं होनी चाहिए। देरी से उसे आरोपी प्रभावित कर सकता है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म का वीडियो बनाने के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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मामला कौशाम्बी के कोखराज थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की मां ने छह जून 24 को एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि 29 अप्रैल 24 को वह रिश्तेदार की मिट्टी में गई थी और पति मजदूरी करने गया था। उनकी 17 वर्षीय बेटी घर में अकेली थी। उसी वक्त उसके स्कूल के प्रधानाचार्य ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया। साथ ही उसका वीडियो बनवाकर वायरल कर दिया। जब परिजनों ने वीडियो देखा तो बेटी ने उन्हें रोते हुए आपबीती बताई।
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पुलिस ने मामले मेें प्रधानाचार्य समेत तीन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। वहीं, आठ जून 2024 से जेल में निरुद्ध वीडियो बनाने के आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। अधिवक्ता ने दलील दी कि दुष्कर्म का आरोप याची पर नहीं है। उस पर केवल वीडियो बनाने का आरोप है। पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि मुख्य अभियुक्त के कहने पर उसका नाम लिया गया है। याची एफआईआर में नामजद भी नहीं है। वहीं, एजीए ने दलील दी कि पीड़िता के मुख्य व प्रतिपरीक्षा में 28 दिन की देरी हुई है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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