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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Disputes over non-repayment of loans cannot be treated as criminal cases; court quashes entire

High Court : कर्ज न लौटाने के विवाद को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, पूरी कार्यवाही कोर्ट ने की निरस्त

Sun, 19 Apr 2026 02:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 19 Apr 2026 02:08 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्ज न लौटाने के विवाद को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ एक मामले में चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी।

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High Court: Disputes over non-repayment of loans cannot be treated as criminal cases; court quashes entire
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्ज न लौटाने के विवाद को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ एक मामले में चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने सुलेमान की ओर से दायर याचिका पर दिया।

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सुलेमान के खिलाफ मथुरा के बरसाना थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने उधार लिए रुपये वापस नहीं किए। मथुरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से सुलेमान को समन जारी किया गया था।
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मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी थी। इसके बाद याची ने हाईकोर्ट में अपील की। कोर्ट ने कहा कि मामला केवल कर्ज की अदायगी से जुड़ा है।
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कर्ज वापस न करना अपने आप में धोखाधड़ी का अपराध नहीं है। जब तक शुरुआत से ही धोखाधड़ी की नीयत साबित न हो, तब तक आपराधिक का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले सतीशचंद्र रतनलाल के मामले का का हवाला दिया। कहा कि साधारण अनुबंध के उल्लंघन को आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता। 

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