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High Court : कैंसर पीड़ित शिक्षिका के स्थानांतरण पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं करने पर हाईकोर्ट नाराज

Thu, 20 Nov 2025 06:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 20 Nov 2025 06:40 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैंसर पीड़ित शिक्षिका के स्थानांतरण पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अत्यंत निराशाजनक है और इससे आश्चर्यचकित हूं।

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High Court displeased over lack of sympathetic consideration of transfer of a teacher suffering from cancer
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैंसर पीड़ित शिक्षिका के स्थानांतरण पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अत्यंत निराशाजनक है और इससे आश्चर्यचकित हूं। साथ ही कहा कि शिक्षिका के मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने का स्पष्ट निर्देश दिया था पर इसे नजरअंदाज कर दिया गया। ऐसे में नाराज कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने शिक्षिका की याचिका पर दिया है।

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शाहजहांपुर के जूनियर हाईस्कूल, सलेमपुर पहाड़ा में सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत स्मृति कल्पना शर्मा कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने गाजियाबाद के एक अस्पताल में सर्जरी कराई है। नियमित कीमोथेरेपी की वजह से उन्हें गाजियाबाद में रहना पड़ रहा है, उनके पति भी वहां नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में उन्होंने गाजियाबाद स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। उस पर विचार न होने पर याचिका दायर की तो 26 सितंबर-2024 को हाईकोर्ट ने बोर्ड सचिव को निर्देश दिया था कि सहानुभूतिपूर्वक विचार करें।

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कोर्ट के आदेश के बावजूद याची का स्थानांतरण नहीं किया गया। इस पर शिक्षिका ने दूसरी याचिका दायर की। बोर्ड सचिव की ओर से कहा गया कि स्कूल में केवल दो शिक्षक हैं। 36 से अधिक छात्र होने पर तीन शिक्षक होने चाहिए। शिक्षिका के स्थानांतरण से पढ़ाई प्रभावित होगी। शिक्षिका म्यूचुअल(परस्पर) ट्रांसफर की नीति के तहत ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।

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हाईकोर्ट ने इन तर्काें को खारिज कर दिया। कहा,राज्य के अनेक स्कूलों में जहां 36 से अधिक बच्चे हैं, सिर्फ एक शिक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में यह तर्क उचित नहीं लगता। नाराज कोर्ट ने बोर्ड सचिव को तीन दिनों के भीतर अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं तो अगली सुनवाई पर 25 नवंबर को उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।

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