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हाईकोर्ट : बिना पक्ष सुने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी अवैध, सेवा बहाली का दिया निर्देश
Fri, 22 Oct 2021 09:55 PM IST
विनोद सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 22 Oct 2021 09:55 PM IST
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Allahabad High Court
- फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर बर्खास्तगी की कार्रवाई अवैध है। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट का दो दिन में जवाब देने का अवसर देना और जांच रिपोर्ट पर सुनवाई का मौका न देना पर्याप्त नहीं है। बर्खास्त करने से पहले सुनवाई का मौका देना जरूरी है। कोर्ट ने जिला कार्यक्रम अधिकारी बिजनौर के याची को बर्खास्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है और सभी परिलाभों सहित सेवा बहाली का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार को नियमानुसार नए सिरे से आदेश देने की छूट दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शहाना परवीन की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि सरकार को याचिका का जवाब देने के लिए कई बार अवसर व अंतिम अवसर के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया गया।
याचिका के कथनों को सही मानते हुए फैसला किया गया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि वह 1 जुलाई 83 से संविदा पर लगातार कार्यरत है। एक व्यक्ति को पुष्टाहार बेचने का आरोप लगाया गया, दो सदस्यीय समिति ने जांच की। आरोप सिद्ध करार देते हुए बर्खास्तगी की संस्तुति की गई। जिसपर जांच रिपोर्ट पर याची का पक्ष सुने बगैर उसे बर्खास्त कर दिया गया। जिसे चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा बर्खास्त करने से पहले सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए था।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शहाना परवीन की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि सरकार को याचिका का जवाब देने के लिए कई बार अवसर व अंतिम अवसर के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया गया।
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याचिका के कथनों को सही मानते हुए फैसला किया गया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि वह 1 जुलाई 83 से संविदा पर लगातार कार्यरत है। एक व्यक्ति को पुष्टाहार बेचने का आरोप लगाया गया, दो सदस्यीय समिति ने जांच की। आरोप सिद्ध करार देते हुए बर्खास्तगी की संस्तुति की गई। जिसपर जांच रिपोर्ट पर याची का पक्ष सुने बगैर उसे बर्खास्त कर दिया गया। जिसे चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा बर्खास्त करने से पहले सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए था।
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