High Court : सरकार की पूर्व अनुमति बगैर पुलिस पर आपराधिक कार्यवाही अवैध
कोर्ट ने यह भी कहा है कि अभिरक्षा में मौत के आरोप में दर्ज एफ आई आर पर पुलिस की अंतिम रिपोर्ट अस्वीकार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पीड़िता को नोटिस जारी कर बयान लेने, गवाहों के बयान लेने के बाद अभियुक्तों को सम्मन जारी करने में कोई विधिक अनियमितता नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मुठभेड़ में घायल अभियुक्त की अस्पताल ले जाते समय मौत पर पुलिस के खिलाफ धारा 197 के तहत सरकार की पूर्व अनुमति लिए बगैर की गई आपराधिक कार्यवाही अवैध है। कोर्ट ने पीड़िता को पुलिस के खिलाफ अभिरक्षा में मौत के आरोप में केस चलाने के लिए सरकार से अनुमति लेने की छूट दी है। कोर्ट ने याची पुलिस अधिकारी के खिलाफ सरकार से बगैर अनुमति लिए की गई आपराधिक कार्यवाही व जारी सम्मन आदेश को अवैध करार देते हुए रद कर दिया है।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि अभिरक्षा में मौत के आरोप में दर्ज एफ आई आर पर पुलिस की अंतिम रिपोर्ट अस्वीकार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पीड़िता को नोटिस जारी कर बयान लेने, गवाहों के बयान लेने के बाद अभियुक्तों को सम्मन जारी करने में कोई विधिक अनियमितता नहीं है। मजिस्ट्रेट की कार्रवाई विधि के विपरीत नहीं है। बिना प्रोटेस्ट के मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं संज्ञान लेने की वैधता को चुनौती देने के तर्क को सही नहीं माना और कहा मजिस्ट्रेट की कार्यवाही कानून के मुताबिक की गई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने थाना रोजा, शाहजहांपुर के पुलिस कर्मी मदनपाल सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। मामले में दो दिसंबर 1999 को पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी के साथ मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल दो बदमाश गिरफ्तार किए गए। इसमें से एक भाग गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया।
याकूब उर्फ गुलाम ख्वाजा की स्पाइनल का आपरेशन करने के लिए लखनऊ केजीएमसी रेफर किया गया। पुलिस ने रिमांड ली और लखनऊ ले जाते समय उसकी मौत हो गई। उसकी पत्नी सैरून ने पुलिस पर अभिरक्षा में हत्या करने का आरोप लगाया और मजिस्ट्रेट को अर्जी दी। जो खारिज हो गई तो सत्र अदालत में पुनरीक्षण दाखिल की। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया और एफ आईआर दर्ज हुई।
पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट पेश की। सीजेएम ने रिपोर्ट अस्वीकार करते हुए कंप्लेंट केस दर्ज किया। शिकायतकर्ता व गवाहों के बयान दर्ज कर अभियुक्त पुलिस कर्मियों को सम्मन जारी किया। जिसे धारा 197 के तहत सरकार की अनुमति बगैर आपराधिक कार्यवाही की वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कार्यवाही अवैध करार देते हुए रद कर दी है।