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High Court : जेल वार्डरों के भोजन भत्ते पर दो माह में निर्णय लें डीजी कारागार, कोर्ट ने दिया आदेश
Sat, 24 Jan 2026 04:18 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 24 Jan 2026 04:18 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल वार्डरों को भोजन भत्ता दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल वार्डरों को भोजन भत्ता दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने महानिदेशक (डीजी), कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा उप्र को निर्देशित किया है कि वह जेल वार्डरों के भोजन भत्ते के दावे पर दो माह के भीतर नियमानुसार उचित निर्णय लें। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार ने गाजियाबाद निवासी वार्डर यशदीप व दो अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए पारित किया है।
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याची के अधिवक्ता ने शरदेंदु मिश्रा ने दलील दी कि जेल वार्डर भोजन भत्ता पाने के पात्र हैं। इस संबंध में अपर पुलिस महानिदेशक की ओर से तीन दिसंबर 2016 को ही पुलिस महानिदेशक को एक सिफारिश भेजी जा चुकी है। सरकार व संबंधित विभाग इस पुरानी सिफारिश और जेल वार्डरों के हक को देखते हुए जल्द निर्णय ले। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि मामले में सबसे पहले विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने भी अपनी सहमति जताई।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी कि वे इस आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ दो सप्ताह के भीतर अपना एक विस्तृत प्रत्यावेदन डीजी कारागार के समक्ष प्रस्तुत करें। सक्षम अधिकारी को प्रत्यावेदन पर दो महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया को कानून के दायरे में रहकर पूरा करना होगा। यदि सक्षम अधिकारी को लगता है कि यह मामला उनके स्तर का नहीं है तो वह इसे संबंधित अन्य उच्च प्राधिकारी को विचारार्थ भेज सकते हैं। विभाग को पूरी तरह स्वतंत्र होकर नियमों के आधार पर फैसला लेना है।
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